
जानिए बच्चों के लिए पोंगल की आसान और मजेदार गतिविधियां, ड्राइंग, कोलम, खेल और क्राफ्ट आइडियाज।
पोंगल बच्चों के लिए मस्ती और आनंद से भरा त्योहार होता है। इस दौरान बच्चे खेलते हैं, रंगोली बनाते हैं और त्योहार से जुड़ी छोटी-छोटी गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। इस लेख में जानिए बच्चों के लिए पोंगल की आसान और मजेदार गतिविधियां।
पोंगल दक्षिण भारत का एक प्रमुख फसल त्योहार है, जिसे हर साल जनवरी में मनाया जाता है। यह पर्व नई फसल के आगमन और सूर्यदेव के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर होता है। उत्तर भारत में इसी समय मकर संक्रांति, पंजाब में लोहड़ी और गुजरात में उत्तरायण मनाई जाती है, जबकि तमिलनाडु में पोंगल को खास उत्साह और परंपराओं के साथ मनाया जाता है।
वर्ष 2026 में पोंगल 14 जनवरी से 17 जनवरी तक चार दिनों तक मनाया जाएगा। इन चार दिनों को भोगी पोंगल, सूर्य पोंगल, मट्टू पोंगल और कानुम पोंगल कहा जाता है। यह त्योहार खेती, पशुधन और प्रकृति के महत्व को दर्शाता है और तमिलनाडु सहित दुनिया भर में बसे तमिल लोग इसे खुशी से मनाते हैं।
1. पोंगल के बारे में जानें: बच्चों को पहले पोंगल का महत्व और इसकी परंपराओं के बारे में बताएं, ताकि वे त्योहार को समझ सकें।
2. सजावट में मदद करें: बच्चे फूल, रंगोली और पौधों से घर और पूजा स्थल सजाने में मदद कर सकते हैं।
3. पोंगल बनाना सीखें: बच्चे भोगी पोंगल या साधारण चावल का पोंगल बनाने में छोटे काम कर सकते हैं। इससे उन्हें संस्कृति और परंपरा का अनुभव मिलेगा।
4. मट्टू पोंगल में भाग लें: यदि संभव हो तो बच्चों को मवेशियों को देखकर और उनकी पूजा में शामिल करके पशुओं के प्रति प्रेम और कृतज्ञता सिखाएँ।
5. खेल: त्योहार के दिन बच्चों के लिए पारंपरिक खेल और गतिविधियाँ आयोजित करें, ताकि वे मज़े भी लें और सीख भी सकें।
1. सजावट: घर और आंगन को फूल, बेलपत्र और रंगोली से सजाया जाता है। खासकर मेन गेट और पूजा स्थल को सुंदर बनाया जाता है।
2. भोगी पोंगल (पहला दिन): पहले दिन पुराने और बेकार सामान को जलाकर भोगी पोंगल मनाते हैं। यह पुराने दुख और बुरी चीजों को दूर करने का प्रतीक है।
3. सूर्य पोंगल (दूसरा दिन): दूसरे दिन सूर्यदेव की पूजा की जाती है। नए चावल, गुड़ और दूध से पोंगल बनाकर उन्हें भोग लगाया जाता है।
4. मट्टू पोंगल (तीसरा दिन): तीसरे दिन मवेशियों का सम्मान किया जाता है। गाएँ और बैल सजाए जाते हैं और उनकी पूजा की जाती है।
5. कानुम पोंगल (चौथा दिन): चौथे दिन परिवार और मित्र मिलकर उत्सव मनाते हैं। लोग नदी, तालाब या बाहर जाकर रिश्तों और मेलजोल को मजबूत करते हैं।
6. भोजन और आनंद: पोंगल बनाकर पूरे परिवार के साथ खाया जाता है। स्वादिष्ट व्यंजन बांटना और मिलकर खाना इस पर्व की खास परंपरा है।
पोंगल केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह खेती, परिवार और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर है। इसे चार दिन तक मनाया जाता है और हर दिन का अलग महत्व होता है।
1. खेती और किसानों के लिए
पोंगल नई फसल आने और मेहनत के परिणाम का उत्सव है। यह किसानों के लिए खास समय होता है, जब वे अपने खेत और उपज के लिए आभार व्यक्त करते हैं और खुशहाली व अच्छी फसल की कामना करते हैं।
2. सूर्य और प्रकृति की पूजा
पोंगल सूर्यदेव को समर्पित है। सूर्य जीवन और ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। इस दिन सूर्य की आराधना की जाती है और स्वास्थ्य, समृद्धि व खुशहाली की प्रार्थना की जाती है। साथ ही वर्षा, धरती और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के लिए भी धन्यवाद व्यक्त किया जाता है।
3. परिवार और समाज में एकता
पोंगल पर पूरा परिवार एकत्र होता है। घर और आंगन सजाना, रंगोली बनाना और मिलकर भोजन तैयार करना परिवार में आपसी प्रेम और सहयोग बढ़ाता है। यह त्योहार रिश्तों को मजबूत करने और समाज में मेल-जोल बढ़ाने का भी अवसर है।
4. मवेशियों का सम्मान
खेती में गाएँ और बैल किसानों के महत्वपूर्ण साथी हैं। मट्टू पोंगल के दिन उनका सम्मान और पूजा की जाती है। इससे बच्चों और युवाओं में पशुओं के प्रति प्रेम और कृतज्ञता की भावना विकसित होती है।
5. संस्कृति और परंपराएं
पोंगल तमिल संस्कृति और परंपराओं को बनाए रखने वाला पर्व है। पारंपरिक गीत, नृत्य, व्यंजन और रीति-रिवाजों के माध्यम से यह त्योहार सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करता है।
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