
पितृ पक्ष नवमी श्राद्ध 2026 कब है? यहां जानें इसकी सही तिथि, पूजा विधि और महत्व। इस दिन नवमी श्राद्ध करने से पितरों की कृपा मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
पितृ पक्ष नवमी श्राद्ध विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए किया जाता है जो असमय निधन को प्राप्त हुई हों। इस दिन तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोजन कराने से पितरों की आत्मा को शांति और परिवार को आशीर्वाद मिलता है।
नवमी श्राद्ध पितृ पक्ष के दौरान आने वाली एक महत्वपूर्ण तिथि है, जब अपने पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है। पितृ पक्ष हिंदू धर्म में एक ऐसा समय होता है जब लोग अपने पितरों का श्राद्ध करके उन्हें तृप्त करते हैं। मान्यता है कि इस दौरान पितर लोक से अपने वंशजों के पास आते हैं और श्राद्ध कर्म से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
नवमी श्राद्ध को मातृ नवमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन श्राद्ध करने का विशेष महत्व है। यह पितृ पक्ष में आने वाली एक खास तिथि है, जिस दिन परिवार की मातृ पितरों का श्राद्ध किया जाता है। इस दिन दिवंगत माताओं, बहनों, या बेटियों का श्राद्ध करने से परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन श्राद्ध करने से माताओं का आशीर्वाद मिलता है, साथ ही श्राद्ध करने वाले व्यक्ति की सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती है। इस दिन मातृ ऋण से भी मुक्ति पाई जा सकती है।
पितृ पक्ष की तिथियां हर साल बदलती रहती हैं। इस साल पितृ पक्ष में नवमी तिथि का श्राद्ध अक्टूबर 4, 2026 (रविवार) को किया जाएगा। इस दिन पितरों का तर्पण किया जाता है। ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है और उन्हें दान दिया जाता है।
श्राद्ध में मातृ नवमी के दिन माताओं की पूजा की जाती है, इसलिए इस दिन का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि मातृ नवमी के दिन श्राद्ध करने से लोगों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। शास्त्रों के अनुसार, जो लोग मातृ नवमी के दिन श्राद्ध करते हैं उन्हें धन, संपत्ति, समृद्धि मिलती है और उनका सौभाग्य सदैव बना रहता है।
मातृ नवमी श्राद्ध के दिन घर की बहुओं को व्रत रखना चाहिए। इस श्राद्ध को सौभाग्यवती श्राद्ध भी कहा जाता है। इस दिन गरीबों या ब्राह्मणों को भोजन कराने से सभी मातृ शक्तियों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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