पितृ पक्ष की अष्टमी 2025 कब है? यहां जानें इसकी सही तिथि, पूजा विधि और महत्व। इस दिन श्राद्ध करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
पितृ पक्ष की अष्टमी श्राद्ध भाद्रपद शुक्ल अष्टमी तिथि को किया जाता है। इस दिन उन पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है जिनकी मृत्यु अष्टमी तिथि को हुई हो। अष्टमी श्राद्ध करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।
पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध करने का विशेष महत्व है। ऐसा कहा जाता है कि यह वो समय होता है जब स्वर्ग से उतरकर पितृ पृथ्वी पर आते हैं और अपने परिवार वालों के पास जाते हैं। यदि पितृ पक्ष में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान विधिवत तरीके से किया जाए तो दिवंगत आत्माओं को शांति मिलती है और वे सुख-संपत्ति के साथ लौटते हैं। पितृ पक्ष के आठवें दिन अष्टमी श्राद्ध किया जाता है।
अष्टमी श्राद्ध पितृ पक्ष के दौरान आने वाली एक महत्वपूर्ण तिथि है। यह तिथि अपने पूर्वजों का श्राद्ध करने के लिए समर्पित होती है। इस दिन परिवार के उन मृत सदस्यों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु अष्टमी तिथि के दिन हुई हो। इस तिथि को अष्टमी श्राद्ध के नाम से जाना जाता है।
पितृ पक्ष की तिथियां हर साल बदलती रहती हैं। इस साल पितृ पक्ष में अष्टमी तिथि का श्राद्ध सितंबर 14, 2025 (रविवार) को रखा जाएगा। इस दिन पितरों का तर्पण किया जाता है। ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है और उन्हें दान दिया जाता है।
अष्टमी श्राद्ध करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। पितृ दोष के कारण व्यक्ति को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जैसे कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, आर्थिक समस्याएं, वैवाहिक जीवन में समस्याएं आदि। पितरों को श्राद्ध देने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। माना जाता है कि पितरों का आशीर्वाद जीवन में सफलता और समृद्धि लाता है। हिंदू धर्म में यह मान्यता है कि श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष मिलता है। मोक्ष का अर्थ है मुक्ति।
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