क्या पितृ दोष से जीवन में रुकावटें आ रही हैं? जानें पितृ दोष निवारण मंत्र, इसकी सही विधि और महत्व, जिससे आप पा सकें पितरों का आशीर्वाद और जीवन में सुख-समृद्धि।
पितृ दोष निवारण मंत्र पूर्वजों की आत्मा की शांति और आशीर्वाद पाने के लिए जप किया जाता है। इस मंत्र का नियमित उच्चारण जीवन की बाधाओं को दूर कर सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और पारिवारिक सौहार्द प्रदान करता है।
पितृ दोष हिंदू धर्म में एक ऐसी मान्यता है, जिसके अनुसार पूर्वजों के अपराधों या असंतोष के कारण व्यक्ति को जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। पितृ दोष निवारण के लिए कई तरह के उपाय किए जाते हैं, जिनमें मंत्र जाप भी एक महत्वपूर्ण उपाय है।
पितृ दोष निवारण मंत्र 'ॐ श्री सर्व पितृ देवताभ्यो नमो नम:', ॐ प्रथम पितृ नारायणाय नम:, ॐ नमो भगवते वासुदेवाय, ये सभी मंत्र आपको पितृ दोष से मुक्ति दिलाने में मदद करते हैं और अगर आप इन मंत्रों का विधि-विधान से जाप करते हैं तो पितरों को मोक्ष मिलता है और उनका आशीर्वाद मिलता है।
इस मंत्र का जाप 108 बार करना बहुत शुभ माना जाता है, लेकिन अगर आप नियमित रूप से इस मंत्र का 11 बार जाप करते हैं तो आपको पितृ दोष से मुक्ति मिल सकती है।
ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात्।
यह मंत्र पितृ देवताओं को समर्पित है और उनका आशीर्वाद पाने के लिए इसका जाप किया जाता है।
ॐ देवताभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नम: स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नम:।
यह मंत्र देवताओं, पितरों और महायोगियों को समर्पित है। इसका जाप करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
ॐ आद्य-भूताय विद्महे सर्व-सेव्याय धीमहि। शिव-शक्ति-स्वरूपेण पितृ-देव प्रचोदयात्।
यह मंत्र पितरों को शिव और शक्ति के स्वरूप में देखकर उनका आवाहन करता है।
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