चौथा श्राद्ध 2025 कब है? यहां जानें इसकी सही तिथि, पूजा विधि और महत्व। पितरों की कृपा और जीवन में सुख-समृद्धि पाने के लिए श्राद्ध करने का महत्व।
चौथे श्राद्ध का आयोजन पितृपक्ष के चौथे दिन किया जाता है। यह श्राद्ध उन पूर्वजों के लिए होता है जिनका निधन चतुर्थी तिथि को हुआ हो। इस दिन श्रद्धालु विधिपूर्वक तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोजन का आयोजन करते हैं।
सभी हिंदुओं के लिए पितृ पक्ष महत्वपूर्ण दिनों में से एक है। 16 श्राद्ध में चौथा दिन जिसे चतुर्थी श्राद्ध नाम से जाना जाता है। परिवार के सदस्य इस दिन अपने उस पूर्वज के लिए श्राद्ध अनुष्ठान करते हैं, जिनकी मृत्यु किसी भी महीने के दो चंद्र पक्ष में से किसी एक की चतुर्थी के दिन हुई थी। इस दिन पूर्वजों का श्राद्ध कर्म किया जाता है। पितृ पक्ष में श्राद्ध करने से पितर प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं।
पितृ पक्ष श्राद्ध कर्म है। श्राद्ध करने के लिए कुतुप मुहूर्त और रौहिण मुहूर्त शुभ माने जाते हैं। इसके बाद का शुभ समय दोपहर के अंत तक रहता है। श्राद्ध के अंत में तर्पण किया जाता है। माना जाता है कि चतुर्थी श्राद्ध करने से पितृ दोष दूर होता है और व्यक्ति को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन पितरों को तर्पण, पिंडदान आदि करके उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। पितरों का आशीर्वाद जीवन में सफलता और सुख-शांति लाता है।
गरुड़ पुराण में कहा गया कि मृत्यु के तेरह दिन बाद आत्मा की यमपुरी की यात्रा शुरू होती है। वह सत्रह दिन के बाद वहां पहुंचता है। यम के दरबार तक पहुंचने के लिए आत्मा ग्यारह महीने तक यात्रा करती है। इस अवधि के दौरान भोजन और पानी प्रदान करने के लिए पिंडदान और तर्पण इस विश्वास के साथ किया जाता है कि इससे आत्मा की भूख और प्यास संतुष्ट होगी।
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