
क्या आप जानना चाहते हैं जबलपुर इस्कॉन मंदिर कब जाएं? कहाँ है? क्या देखें? फोटो और पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें और करें अपनी यात्रा को भक्तिमय।
जबलपुर स्थित इस्कॉन मंदिर सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि भक्ति, आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक सुंदरता का अनोखा मेल है। आज के इस लेख में हम आपको बताएंगे जिसमें जबलपुर के इस्कॉन मंदिर की विशेषताएं, दर्शन औऱ आरती का समय, प्रसाद वितरण औऱ वहां तक पहुंचने का मार्ग तो पढ़े हमारे इस लेख को पूरा औऱ जानें सब एख साथ।
इस्कॉन जबलपुर श्री कृष्ण को समर्पित मंदिर है। इसे श्री राधा रमण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह आध्यात्मिक केंद्र नर्मदा चैतन्य व्यू, चौकिताल, लमेटाघाट रोड, जबलपुर, मध्य प्रदेश पर स्थित है जोकि शहर से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर है। मंदिर में धार्मिक आयोजन, कथा प्रवचन, कीर्तन और भजन नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 1966 में ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी श्रील प्रभुपाद द्वारा न्यूयॉर्क, अमेरिका में इस्कॉन की नींव रखी गई थी। उसी प्रेरणा और उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए, मध्य प्रदेश के प्रमुख शहर जबलपुर में इस्कॉन मंदिर की स्थापना की गई। यह मंदिर इस्कॉन इंदौर की देखरेख में संचालित होता है। इस मंदिर की स्थापना का मूल उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति को जनमानस तक पहुंचाना, वैदिक धर्म का प्रचार-प्रसार करना और विशेष रूप से युवाओं में आध्यात्मिक जागरूकता उत्पन्न करना है।
इस्कॉन जबलपुर मंदिर, में प्रतिदिन भजन, कीर्तन, श्रीमद्भागवत कथा और आरती का आयोजन होता है। यहां जन्माष्टमी, रथ यात्रा और गौर पूर्णिमा जैसे त्योहारों पर भव्य झांकियां, संकीर्तन और भंडारों का आयोजन भी किया जाता होता है। वहीं, मंदिर की सुंदर वास्तुकला, जिसमें श्रीकृष्ण लीला से जुड़ी सुंदर नक्काशी, चित्रकारी और भित्तिचित्र देखने को मिलते हैं। इस्कॉन जबलपुर मंदिर में साप्ताहिक भोज कार्यक्रम आयोजित होता है।
इस्कॉन जबलपुर मंदिर में प्रतिदिन दर्शन-आरती होती है। मंदि्र के तय समअनुसार आने वाले भक्तों को भगवान के दर्शन प्राप्त होते हैं। विशेष पर्व या कार्यक्रमों के दिन समय में हल्का परिवर्तन हो सकता है, ऐसी स्थिति में मंदिर प्रशासन से पूर्व संपर्क किया जा सकता है। नीचे रोजाना दर्शन औऱ आरती का समय बताया जा रहा है।
मंदिर के कपाट: सुबह 4:30 बजे खुलते हैं
सुबह मंगल आरती: 5:00 बजे तक
तुलसी आरती: 5:00 बजे के बाद
सुबह की आरती-अभिषेक और गीता/भागवतम प्रवचन: 7:15 से 7:45 बजे तक
मंदिर विश्राम: 1:00 बजे से 4:00 बजे तक बंद रहता है
संध्या आरती: 7:00 से 7:30 बजे तक
अंतिम दर्शन समारोह (शयन आरती): रात 8:30 से 9:00 बजे तक
इस्कॉन जबलपुर में मनाए जाने वाले सभी त्योहार बहुत ही धूमधाम औऱ उल्लास के साथ मनाए जाते हैं। भक्त और भक्तों की भक्ति इस समय देखते ही बनती है।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमीः श्रीकृष्ण जन्माष्टमी सबसे भव्य और प्रमुख त्योहार है। इस दिन हज़ारों श्रद्धालु इस दिन मंदिर में दर्शन, कीर्तन और प्रसाद प्राप्त करने आते हैं। आधी रात को भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य की विशेष आरती होती है।
रथ यात्रा (भगवान जगन्नाथ उत्सवः भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की शोभायात्रा नगर के विभिन्न मार्गों से निकाली जाती है। भक्तगण रथ खींचने में भाग लेते हैं और हरिनाम संकीर्तन करते हैं।
गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सवः दीपावली के अगले दिन गोवर्धन लीला की स्मृति में यह उत्सव मनाया जाता है। अन्नकूट में सैकड़ों प्रकार के व्यंजन भगवान को अर्पित किए जाते हैं। गोवर्धन पर्वत की प्रतीकात्मक आकृति बनाकर उसकी पूजा होती है।
गौर पूर्णिमा (भगवान चैतन्य महाप्रभु प्राकट्य दिवसः यह दिन भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु के प्रकट होने की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, हरिनाम संकीर्तन करते हैं और ध्यान में लीन रहते हैं।
होली (राधा-कृष्ण की फूलों वाली होली) इस दिन राधा-कृष्ण की होली लीला की झांकी प्रस्तुत की जाती है। रंगों की जगह फूलों की होली होती है, जिसमें श्रद्धालु आनंदपूर्वक भाग लेते हैं।
राम नवमीः भगवान श्रीराम के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। श्रीराम कथा, कीर्तन और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
नरसिंह चतुर्दशी: भगवान नरसिंहदेव के प्राकट्य दिवस पर विशेष पूजा और कथा आयोजित की जाती है।
इस्कॉन जबलपुर में हर दिन आरती और कीर्तन के बाद निशुल्क प्रसाद दिया जाता है। यह प्रसाद शुद्ध, सात्विक और पूरी श्रद्धा से तैयार किया जाता है। हर रविवार को विशेष सत्संग और भजन संध्या के बाद सभी को भोजन प्रसाद के रूप में दिया जाता है। बात करें प्रसाद और भोजन की व्यवस्था कि तो मंदिर परिसर में ही भोजन तैयार किया जाता है। रसोई में सेवा करने वाले लोग स्वयंसेवक होते हैं, जो सेवा भाव से भोजन पकाते और परोसते हैं। हर प्रक्रिया में भगवान श्रीकृष्ण को केंद्र में रखकर कार्य किया जाता है। जन्माष्टमी, राधाष्टमी, गोवर्धन पूजा जैसे पर्वों पर हजारों श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से प्रसाद तैयार किया जाता है।
इस्कॉन जबलपुर पहुंचने के लिए ऑटो, ई- रिक्शा, टैक्सी या निजी वाहन के माध्यम से आसानी से इस मंदिर तक जा सकते हैं।
सड़क मार्ग से: जबलपुर शहर सड़क मार्ग से मध्य प्रदेश और आस-पास के कई बड़े शहरों जैसे भोपाल, इंदौर, रीवा, सतना, कटनी और नागपुर से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। अगर आप अपने निजी साधन से यात्रा की सोचेंगे तो एनएच 30-34 से आराम से पहुच जाएंगे। फिर लमेटाघाट रोड होते हुए सीधे इस्कॉन श्री श्री राधा रमण मंदिर पहुंच सकते हैं।शहर के भीतर ओला, उबर, टैक्सी और ऑटो रिक्शा जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं, जिससे स्थानीय आवाजाही सुगम बन जाती है।
बस से: जबलपुर का आईएसबीटी (नया बस स्टैंड) और पुराना बस स्टैंड राज्य और निजी बस सेवाओं द्वारा विभिन्न शहरों से सीधे जुड़ा हुआ है। मध्य प्रदेश एवं निकटवर्ती राज्यों से रोजाना बस आती जाती हैं। यहां बस स्टॉप से जबलपुर के इस्कॉन मंदिर 5-6 किमी दूर है। टैक्सी और ऑटो रिक्शा जैसी सुविधा से आराम से मंदिर पहुंच सकते हैं।
हवाई मार्ग: इस्कॉन मंदिर, जबलपुर से सबसे निकटतम हवाई अड्डा डुमना एयरपोर्ट (जबलपुर एयरपोर्ट – JLR) लगभग 25 से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह एयरपोर्ट दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, भोपाल सहित देश के कई प्रमुख शहरों से नियमित विमान सेवाओं के माध्यम से जुड़ा हुआ है। हवाई अड्डे से बाहर निकलने के बाद आपको टैक्सी, कैब या निजी वाहन की सुविधा आसानी से उपलब्ध हो जाती है, जिनकी मदद से आप मंदिर तक आरामदायक और सुविधाजनक यात्रा कर सकते हैं।
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