वसंत पूर्णिमा कब है 2026
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वसंत पूर्णिमा कब है 2026

क्या आप जानना चाहते हैं कि वसंत पूर्णिमा 2026 में कब है और इसका धार्मिक महत्व क्या है? इस लेख में जानिए सही तिथि, पूजा-विधि, शुभ मुहूर्त, व्रत के नियम और इस दिन किए जाने वाले विशेष उपाय – सब कुछ सरल और स्पष्ट भाषा में।

वसंत पूर्णिमा के बारे में

वसंत पूर्णिमा हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। यह दिन ऋतु परिवर्तन और प्रकृति के सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है। इस समय वातावरण में मधुरता, हरियाली और उत्साह का संचार होता है। कई स्थानों पर पूजा-पाठ, दान और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। यह पर्व आनंद, नवजीवन और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देता है।

वसंत पूर्णिमा क्या होती है?

वसंत ऋतु के मध्यम चरण में आने वाली पूर्णिमा को वसंत पूर्णिमा कहा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह तिथि फाल्गुन मास की पूर्णिमा को आती है, इसलिए इसे फाल्गुन पूर्णिमा भी कहा जाता है। यही तिथि आगे चलकर होली पर्व का आधार बनती है। भारत के कई हिस्सों में इस दिन विशेष उत्सव मनाया जाता है। पश्चिम बंगाल, पुरी, मथुरा और वृंदावन में यह पर्व दोल यात्रा, दोल उत्सव या डोल पूर्णिमा के नाम से प्रसिद्ध है। इन स्थानों पर यह दिन भक्ति, संगीत और रंगों के साथ बड़े उत्साह से मनाया जाता है।

वसंत पूर्णिमा 2026 कब है?

वसन्त पूर्णिमा 03 मार्च 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि का प्रारम्भ 02 मार्च 2026 को शाम 05 बजकर 55 मिनट से होगा। पूर्णिमा तिथि का समापन 03 मार्च 2026 को शाम 05 बजकर 07 मिनट तक रहेगा।

  • वसन्त पूर्णिमा 03 मार्च, 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी।
  • पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - मार्च 02, 2026 को 05:55 पी एम बजे से
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त - मार्च 03, 2026 को 05:07 पी एम बजे तक

वसंत पूर्णिमा के अन्य शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04 बजकर 41 मिनट से 05 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।
  • प्रातः सन्ध्या: प्रातः 05 बजकर 05 मिनट से 06 बजकर 19 मिनट तक होगी।
  • अभिजित मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 47 मिनट से 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा।
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02 बजकर 07 मिनट से 02 बजकर 54 मिनट तक होगा।
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 05 बजकर 58 मिनट से 06 बजकर 23 मिनट तक रहेगा।
  • सायाह्न सन्ध्या: शाम 06 बजकर 01 मिनट से 07 बजकर 15 मिनट तक होगी।
  • अमृत काल: 04 मार्च को प्रातः 01 बजकर 13 मिनट से 02 बजकर 49 मिनट तक रहेगा।
  • निशिता मुहूर्त: रात्रि 11 बजकर 45 मिनट से 04 मार्च को रात्रि 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा

वसंत पूर्णिमा कैसे मनाई जाती है?

वसंत पूर्णिमा को कई स्थानों पर सांस्कृतिक पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। पश्चिम बंगाल में इस दिन नृत्य, भजन, संगीत और शोभायात्रा का आयोजन होता है। लोग पारंपरिक वस्त्र पहनकर उत्सव में भाग लेते हैं। कई जगहों पर रंगों के साथ भी इस दिन उत्सव मनाया जाता है, जो होली के आगमन का संकेत देता है।

वसंत पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

वसंत पूर्णिमा को अत्यंत शुभ तिथि माना गया है। इस दिन व्रत और पूजा करने से मानसिक शांति, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन धन की देवी माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। इसलिए इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। यह दिन भक्ति, पवित्रता और नए आरंभ का प्रतीक है। वसंत ऋतु की मधुरता और प्रकृति की सुंदरता भी इस पर्व को और अधिक विशेष बना देती है।

वसंत पूर्णिमा की पूजा विधि

  • सबसे पहले प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थान को साफ करें और वहां भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • दीपक जलाएं और भगवान को पुष्प, अक्षत, चंदन और प्रसाद अर्पित करें।
  • “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” और “ॐ ह्रीं क्लीं महालक्ष्मेय नमः” मंत्र का जाप करें।
  • भगवान को फल, मिठाई और मेवे का भोग ज़रूर लगाएं।
  • अब अपनी श्रद्धा अनुसार भगवान को दक्षिणा भी अर्पित करें।
  • इसके बाद आरती करें और अंत में क्षमा प्रार्थना करें।
  • अब पूजा के अंत में आपको अपने हाथ में अक्षत (चावल) और पुष्प (फूल) लेकर पूजा के दौरान हुई किसी भी छोटी बड़ी गलती के लिए भगवान जी से क्षमा मांगे और फिर अक्षत और पुष्प यानी की चावल और फूल को भगवान के चरणों में अर्पण कर दें।
  • वसंत पूर्णिमा के दिन चंद्र उदय के बाद चन्द्र देवता को अर्घ्य दें और अपने व्रत को पूर्ण करें। पूर्णिमा पर चंद्र देवता का दर्शन करने के बाद ही इस पवित्र दिन का व्रत पूर्ण माना जाता है।

वसंत पूर्णिमा के दिन क्या करें?

  • दिन की शुरुआत में सबसे पहले प्रातःकाल स्नान करें, फिर व्रत, पूजा का संकल्प लें और ध्यान करें।
  • इस दिन आप दान-पुण्य अवश्य करें, व्रत के दिन किन्ही भी जरूरतमंदों को वस्त्र, अन्न, फल या धन का दान करना बहुत शुभ माना जाता है।
  • इस दिन आप माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा पूरे विधि-विधान से ज़रूर करें।
  • घर में इस दिन साफ-सफाई रखें और प्रयास करें की घर का वातावरण पवित्र एवं सकारात्मक बना रहे।
  • पूरे दिन शांत और संयमित व्यवहार रखें। और सत्य बोलें।
  • मन, वचन एवं कर्म से पूर्ण रूप से शुद्ध रहने की कोशिश करें।

वसंत पूर्णिमा के दिन क्या न करें?

  • क्रोध और झगड़े से दूर रहें एवं अपशब्दों का प्रयोग ना करें।
  • इस दिन किसी का अपमान नहीं करना चाहिए और ना ही किसी को कष्ट पहुँचाना चाहिए।
  • इस दिन मांसाहार का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • तामसिक भोजन, नशीले पदार्थ एवं मन में आने वाले नकारात्मक विचारों से बहुत दूर रहें।
  • किसी भी प्रकार का अशुद्ध या अनुचित कार्य न करें।

वसंत पूर्णिमा और होली का संबंध

इस वसंत पूर्णिमा का संबंध होली से है। फाल्गुन पूर्णिमा की रात को ही होलिका दहन किया जाता है एवं अगले दिन पूरे देश में धूमधाम से रंगों की होली खेली जाती है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देता है। भक्त प्रह्लाद की कथा इस दिन की महत्ता को दर्शाती है। इस प्रकार वसंत पूर्णिमा धार्मिक ही नहीं, सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

क्या है बंगाल की दोल यात्रा या डोल पूर्णिमा?

डोल पूर्णिमा विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में मनाया जाने वाला उत्सव है। यह राधा-कृष्ण को समर्पित होता है। इस दिन राधा-कृष्ण की प्रतिमा को सजे हुए झूले पर विराजमान कर पूजा की जाती है।

भजन-कीर्तन, शंख ध्वनि और शोभायात्रा के साथ यह पर्व बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है। भक्त अबीर-गुलाल से उत्सव का आनंद लेते हैं। शांतिनिकेतन में इसी दिन वसंत उत्सव भी मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने की थी। यह उत्सव कला, संस्कृति और प्रकृति के मेल का सुंदर उदाहरण है।

इस प्रकार वसंत पूर्णिमा धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। यह दिन वसंत ऋतु की सुंदरता, भक्ति की भावना और होली के आनंद की शुरुआत का प्रतीक है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया व्रत और पूजा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने का मार्ग प्रशस्त करता है।

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Published by Sri Mandir·March 3, 2026

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