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उगादी कब है 2026

क्या आप जानना चाहते हैं कि उगादी 2026 में कब मनाई जाएगी और इसका धार्मिक महत्व क्या है? इस लेख में जानिए उगादी की सही तिथि, दक्षिण भारत में मनाए जाने वाले इस नववर्ष पर्व की परंपराएँ और इससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।

उगादी के बारे में

Ugadi हिंदू नववर्ष का प्रमुख पर्व है, जो विशेष रूप से दक्षिण भारत में मनाया जाता है। यह चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को आता है और नए साल की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन घरों की सफाई, सजावट, पूजा और विशेष व्यंजन बनाए जाते हैं। लोग नए संकल्प लेते हैं और सुख, समृद्धि तथा अच्छे भविष्य की कामना करते हैं। यह पर्व नई आशा और सकारात्मकता का संदेश देता है।

उगादी 2026

उगादी दक्षिण भारत का प्रमुख नववर्ष पर्व है, जिसे विशेष रूप से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व चंद्र-सौर पंचांग पर आधारित होता है और नए संवत्सर की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। उगादी जीवन में नए आरंभ, आशा, संतुलन और सकारात्मकता का संदेश देता है। इस दिन लोग घर की साफ-सफाई करते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ नए वर्ष का स्वागत करते हैं। यह भी मान्यता है कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना का कार्य आरंभ किया था।

उगादी 2026 कब मनाया जाएगा?

हिंदू पंचांग के अनुसार उगादी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में उगादी गुरुवार, 19 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। यह तिथि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के सूर्योदय के साथ होने के कारण उगादी पर्व के लिए शुभ मानी गई है।

उगादी की तिथि हर वर्ष बदलती रहती है, क्योंकि यह ग्रेगोरियन कैलेंडर पर नहीं बल्कि चंद्र-सौर गणना पर आधारित होती है। इसलिए यह पर्व प्रायः मार्च या अप्रैल में आता है। महाराष्ट्र में यही दिन गुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है, जबकि उत्तर भारत में इसी दिन से चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ होता है।

उगादी तिथि

19 मार्च 2026 , गुरुवार

प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ

 मार्च 19, 2026 को 06:52 AM

प्रतिपदा तिथि समाप्त

मार्च 20, 2026 को 04:52 AM

जानें उगादी के शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त - 04:47 AM से 05:35 AM
  • प्रातः सन्ध्या - 05:11 AM से 06:22 AM
  • अभिजित मुहूर्त - 12:01 PM से 12:49 PM
  • विजय मुहूर्त - 02:26 PM से 03:14 PM
  • गोधूलि मुहूर्त - 06:26 PM से 06:50 PM
  • सायाह्न सन्ध्या - 06:28 PM से 07:39 PM
  • अमृत काल - 11:32 PM से 01:03 AM, मार्च 20
  • निशिता मुहूर्त - 12:01 AM, मार्च 20 से 12:49 AM, मार्च 20
  • सर्वार्थ सिद्धि योग - 04:05 AM, मार्च 20 से 06:22 AM, मार्च 20

विभिन्न क्षेत्रों में उगादी का त्योहार

उगादी भारत के प्रमुख नववर्ष पर्वों में से एक है, जिसे देश के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। यह पर्व चंद्रमान पंचांग के अनुसार नए वर्ष की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है और जीवन में नई ऊर्जा, आशा और सकारात्मकता लाने का संदेश देता है।

  • कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र और कोंकणी समुदाय में इसे युगादी कहा जाता है, जिसका अर्थ है “नए युग की शुरुआत।”
  • तमिलनाडु में यह पर्व उगादी और युगादी दोनों नामों से जाना जाता है।
  • महाराष्ट्र में यही दिन गुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है, जहां घरों के बाहर गुड़ी फहराई जाती है, जो विजय, समृद्धि और शुभारंभ का प्रतीक है।
  • गोवा और केरल में इसे संवत्सर पड़वा, राजस्थान में थापना, कश्मीर में नवरेह, और मणिपुर में साजिबु नोंगमा पांबा या मेइतेई चेइराओबा कहा जाता है।
  • हर क्षेत्र में पूजा विधि और परंपराएं भले ही अलग हों, लेकिन भाव समान रहता है - नववर्ष का स्वागत।
  • कर्नाटक में युगादी के दिन बेवु-बेला (नीम और गुड़) खाया जाता है, जो जीवन के सुख-दुख दोनों को समान भाव से स्वीकार करने का संदेश देता है।
  • आम के पत्तों से घर की सजावट और विशेष व्यंजन इस दिन का खास हिस्सा होते हैं।
  • आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में उगादी को तेलुगु नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। इस दिन देवी-देवताओं की पूजा, पारिवारिक मिलन और पारंपरिक पकवानों का विशेष महत्व होता है।
  • वहीं उत्तर भारत में इसी तिथि से चैत्र नवरात्रि का आरंभ होता है, जिससे यह दिन धार्मिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

उगादी का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में उगादी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन से तेलुगु नववर्ष का आरंभ होता है और आंध्र प्रदेश, तेलंगाना तथा कर्नाटक में इसे बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। उगादी का पर्व वसंत ऋतु के आगमन का भी प्रतीक है, जो नई ऊर्जा, हरियाली और सकारात्मकता लेकर आता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार उगादी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है, जो सामान्यतः मार्च या अप्रैल माह में पड़ती है। यह दिन नए संवत्सर की शुरुआत का संकेत देता है। सनातन परंपरा में संवत्सर 60 वर्षों के चक्र में चलते हैं और प्रत्येक वर्ष का एक अलग नाम और महत्व होता है।

‘युगादी’ शब्द संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है - ‘युग’ अर्थात काल या युग और ‘आदि’ यानी आरंभ। इस प्रकार उगादी को नए युग और नए वर्ष की शुरुआत माना जाता है। चंद्र-सौर पंचांग के अनुसार यह पर्व नव आरंभ, शुभ कार्यों और आध्यात्मिक उन्नति का संदेश देता है।

इस शुभ दिन लोग विभिन्न मंदिरों में जाकर भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं। साथ ही घरों में तरह-तरह के व्यंजन और मिठाइयाँ बनाई जाती हैं, जिन्हें परिवार, मित्रों और रिश्तेदारों के साथ मिलकर आनंदपूर्वक साझा किया जाता है।

उगादी पर्व: पूजा-अनुष्ठान और परंपराएं

  • उगादी के दिन लोग प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करते हैं
  • स्नान से पहले शरीर पर तेल लगाना शुभ माना जाता है।
  • इसके बाद स्वच्छ और नए वस्त्र धारण किए जाते हैं तथा घर को चावल के आटे से बनी रंगोली और आम के पत्तों से सजाया जाता है।
  • इस दिन विशेष रूप से उगादी पचड़ी बनाई जाती है, जिसमें नीम की पत्तियां, गुड़ और इमली का प्रयोग होता है, जो जीवन के विभिन्न स्वादों का प्रतीक है।
  • फिर लोग मंदिर जाकर भगवान और देवी को भोग-प्रसाद अर्पित करते हैं।
  • पूजा के बाद वही प्रसाद परिवार के सभी सदस्यों में बांटा जाता है।
  • दिन भर हर्षोल्लास के साथ पर्व मनाया जाता है और एक-दूसरे को उपहार देकर शुभकामनाएं दी जाती हैं।
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Published by Sri Mandir·March 12, 2026

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