सोम प्रदोष व्रत कब है 2026
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सोम प्रदोष व्रत कब है 2026

क्या आप जानना चाहते हैं कि सोम प्रदोष व्रत 2026 में कब रखा जाएगा और इसका धार्मिक महत्व क्या है? इस लेख में जानिए सोम प्रदोष व्रत की सही तिथि, भगवान शिव की पूजा का महत्व और इस दिन किए जाने वाले व्रत व पूजा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।

सोम प्रदोष व्रत के बारे में

सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है, जो सोमवार के दिन प्रदोष काल में किया जाता है। इस दिन शिव पूजा, व्रत और मंत्र जाप से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। श्रद्धालु उपवास रखते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध अर्पित करते हैं, जिससे सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

सोम प्रदोष व्रत 2026

सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित अत्यंत पवित्र और फलदायी व्रत माना जाता है। प्रत्येक हिन्दू चंद्र मास में दो बार, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। जब यह त्रयोदशी तिथि सोमवार के दिन आती है, तब इसे ‘सोम प्रदोष व्रत’ कहा जाता है। सोमवार भगवान शिव को समर्पित दिन है। मान्यता है कि इस दिन प्रदोष काल में सच्चे मन से शिव–पार्वती की पूजा करने से पापों का नाश होता है, नकारात्मक कर्म समाप्त होते हैं और जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि का आगमन होता है।

2026 में सोम प्रदोष व्रत कब–कब है?

16 मार्च 2026, सोमवार

  • मास एवं पक्ष: चैत्र, कृष्ण पक्ष त्रयोदशी
  • प्रदोष काल: सायं 06:07 बजे से 08:31 बजे तक (अवधि – 02 घंटे 24 मिनट)
  • त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ: 16 मार्च 2026, प्रातः 09:40 बजे
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 17 मार्च 2026, प्रातः 09:23 बजे

30 मार्च 2026, सोमवार

  • मास एवं पक्ष: चैत्र, शुक्ल पक्ष त्रयोदशी
  • प्रदोष काल: सायं 06:13 बजे से 08:33 बजे तक (अवधि – 02 घंटे 19 मिनट)
  • त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ: 30 मार्च 2026, प्रातः 07:09 बजे
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 31 मार्च 2026, प्रातः 06:55 बजे

10 अगस्त 2026, सोमवार

  • मास एवं पक्ष: श्रावण, कृष्ण पक्ष त्रयोदशी
  • प्रदोष काल: सायं 06:37 बजे से 08:48 बजे तक (अवधि – 02 घंटे 10 मिनट)
  • त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ: 10 अगस्त 2026, प्रातः 08:00 बजे
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 11 अगस्त 2026, प्रातः 04:54 बजे

21 दिसम्बर 2026, सोमवार

  • मास एवं पक्ष: मार्गशीर्ष, शुक्ल पक्ष त्रयोदशी
  • प्रदोष काल: सायं 05:36 बजे से 07:54 बजे तक (अवधि – 02 घंटे 19 मिनट)
  • त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ: 21 दिसम्बर 2026, सायं 05:36 बजे
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 22 दिसम्बर 2026, दोपहर 02:23 बजे

सोम प्रदोष व्रत का महत्व

शास्त्रों और पुराणों में सोम प्रदोष व्रत का विशेष महत्व वर्णित है। ‘प्रदोष’ शब्द का अर्थ है ‘दोषों का नाश’। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में होते हैं और अपने भक्तों पर कृपा की वर्षा करते हैं।

सोमवार स्वयं शिवजी का प्रिय दिन है। इसलिए जब प्रदोष व्रत सोमवार को आता है, तब उसका फल कई गुना बढ़ जाता है। यह व्रत विशेष रूप से पारिवारिक सुख, वैवाहिक जीवन की स्थिरता, संतान सुख और आर्थिक समृद्धि के लिए रखा जाता है। स्त्रियां उत्तम और सौभाग्यशाली पति की कामना से यह व्रत करती हैं।

शिव पुराण में उल्लेख मिलता है कि जो भक्त श्रद्धापूर्वक सोम प्रदोष व्रत करते हैं, उन्हें सम्मान, धन, संतान और सुख की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही ये भी मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को जन्म–मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है।

सोम प्रदोष व्रत पूजा विधि

  • सोम प्रदोष व्रत के दिन प्रातः सूर्योदय से पहले उठें। स्नान करके स्वच्छ और हल्के रंग के वस्त्र धारण करें। मन को शांत रखें और भगवान शिव का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • दिनभर उपवास रखें। यदि संभव हो तो निर्जल व्रत रखें, अन्यथा अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार या केवल जल ग्रहण करें। व्रत के दौरान मन, वाणी और व्यवहार की पवित्रता बनाए रखें। अधिक से अधिक समय भगवान शिव के ध्यान और जप में लगाएँ।
  • सायंकाल प्रदोष काल में पूजा की तैयारी करें। पूजा स्थान को स्वच्छ करें और भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग स्थापित करें। सबसे पहले जल अर्पित करें, उसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर मिलाकर पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें।
  • इसके बाद बेलपत्र अर्पित करें। ध्यान रखें कि बेलपत्र खंडित न हो। साथ ही धतूरा, पुष्प, नारियल, फल, धूप और अगरबत्ती अर्पित करें।
  • पूजा के समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जप करें। इसके साथ ही महामृत्युंजय मंत्र का भी 108 बार जाप करें। यदि संभव हो तो शिव चालीसा का पाठ करें और सोम प्रदोष व्रत कथा का श्रवण करें।
  • पूजा के अंत में आरती करें और भगवान शिव से सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।
  • व्रत का समापन सायंकाल पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करके करें। यदि आप अगले दिन पारण करना चाहें, तो प्रातः स्नान के बाद भोजन ग्रहण कर व्रत पूर्ण करें।

सोम प्रदोष व्रत के लाभ

  • श्रद्धा और नियमपूर्वक सोम प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है, नकारात्मक कर्मों का प्रभाव कम होता है, और मन में शांति व स्थिरता आती है।
  • इस व्रत के प्रभाव से वैवाहिक जीवन में आ रही बाधाएँ धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं। पति–पत्नी के संबंधों में मधुरता आती है। विवाह योग्य युवक–युवतियों के लिए अनुकूल प्रस्ताव और शीघ्र विवाह के योग बनते हैं।
  • जो दंपत्ति संतान सुख की कामना रखते हैं, वे इस दिन श्रद्धापूर्वक पंचगव्य से शिवलिंग का अभिषेक करें। मान्यता है कि इससे संतान प्राप्ति में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं और शुभ फल की प्राप्ति होती है
  • आर्थिक उन्नति और करियर में सफलता की इच्छा रखने वाले भक्त दूध से अभिषेक कर शिवलिंग पर पुष्पमाला अर्पित करें। इससे कार्यों में स्थिरता, प्रगति और धन लाभ के मार्ग खुलते हैं।
  • नियमित रूप से सोम प्रदोष व्रत करने से स्वास्थ्य में सुधार, धन–समृद्धि, सामाजिक मान–सम्मान और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है।
  • श्रद्धा और नियमपूर्वक सोम प्रदोष व्रत करने से जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। 2026 में आने वाले सोम प्रदोष व्रत के अवसर पर यदि आप सच्चे मन से शिव आराधना करेंगे, तो निश्चित ही भोलेनाथ की असीम कृपा आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाएगी।

सोम प्रदोष व्रत कथा

पुराणों में सोम प्रदोष व्रत से जुड़ी एक कथा मिलती है, जिसके अनुसार, एक नगर में एक ब्राह्मणी रहती थी, जिसका पति स्वर्गवासी हो चुका था। वह अपने पुत्र के साथ भिक्षाटन कर जीवन यापन करती थी। एक दिन उसे मार्ग में एक घायल बालक मिला, जिसे वह दया वश अपने घर ले आई। वह बालक विदर्भ का राजकुमार था, जिसके राज्य पर शत्रुओं ने अधिकार कर लिया था।

राजकुमार ब्राह्मणी के घर रहने लगा। एक दिन अंशुमति नामक गंधर्व कन्या ने उसे देखा और उससे प्रेम कर बैठी। भगवान शिव के आदेश से दोनों का विवाह हुआ। ब्राह्मणी नियमित रूप से प्रदोष व्रत करती थी। उसके व्रत के प्रभाव और गंधर्वराज की सहायता से राजकुमार ने अपना राज्य पुनः प्राप्त कर लिया।

इस कथा से स्पष्ट होता है कि सोम प्रदोष व्रत के प्रभाव से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं और भक्तों की किस्मत बदल जाती है। इसलिए इस दिन सोम प्रदोष व्रत का अनुष्ठान करना और ये कथा सुनना या पढ़ना अत्यंत शुभ माना गया है।

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Published by Sri Mandir·March 26, 2026

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