गजानन संकष्टी चतुर्थी क्या है?
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गजानन संकष्टी चतुर्थी क्या है?

क्या आप जानना चाहते हैं कि गजानन संकष्टी चतुर्थी क्यों मनाई जाती है और इसका क्या महत्व है? इस लेख में जानिए भगवान गणेश को समर्पित इस विशेष व्रत का धार्मिक महत्व, पूजा विधि, कथा और इस दिन किए जाने वाले खास उपायों की पूरी जानकारी।

गजानन संकष्टी चतुर्थी के बारे में

गजानन संकष्टी चतुर्थी भगवान श्री गणेश को समर्पित एक पवित्र व्रत है। यह दिन विघ्नहर्ता गणपति की पूजा, उपवास और चंद्र दर्शन के लिए विशेष माना जाता है। भक्त इस दिन भगवान गणेश से सुख, समृद्धि और संकटों से मुक्ति की कामना करते हैं। गजानन संकष्टी चतुर्थी श्रद्धा और भक्ति का महत्वपूर्ण पर्व है। आइये इस लेख के माध्यम से जानते हैं इस विशेष त्यौहार के बार में....

1.गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026 की सम्पूर्ण जानकारी2.गजानन संकष्टी चतुर्थी कब है?3.गजानन संकष्टी चतुर्थी के शुभ मुहूर्त4.गजानन संकष्टी चतुर्थी क्या है?5.हिंदू धर्म में गजानन संकष्टी चतुर्थी का महत्व6.गजानन संकष्टी चतुर्थी का ज्योतिषीय महत्व7.गजानन संकष्टी चतुर्थी का आध्यात्मिक महत्व8.गजानन संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व9.गजानन संकष्टी चतुर्थी से जुड़ी परंपराएं और मान्यताएं10.गजानन संकष्टी चतुर्थी कैसे मनाई जाती है?11.गजानन संकष्टी चतुर्थी की तैयारी कैसे की जाती है?12.गजानन संकष्टी चतुर्थी पूजा सामग्री13.गजानन संकष्टी चतुर्थी व्रत की पूजा विधि14.प्रातःकाल की तैयारी15.व्रत का संकल्प और नियम16.पूजा स्थल की स्थापना17.गणेश जी का आवाहन और पूजन18.भोग अर्पण19.मंत्र जाप और व्रत कथा20.आरती21.चन्द्रमा को अर्घ्य देना (पारण विधि)22.गजानन संकष्टी चतुर्थी में किए जाने वाले पवित्र कार्य23.गजानन संकष्टी चतुर्थी के दिन किए जाने वाले शुभ कार्य

गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026 की सम्पूर्ण जानकारी

हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनसे ही होती है। ऐसे में हर महीने आने वाली संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व होता है, लेकिन श्रावण मास की गजानन संकष्टी चतुर्थी को अत्यंत प्रभावशाली और फलदायी माना गया है। यह दिन विशेष रूप से उन भक्तों के लिए महत्वपूर्ण होता है जो अपने जीवन के संकटों से मुक्ति, मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

यह व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, अनुशासन और भगवान के प्रति समर्पण का प्रतीक भी है। आइए अब सभी पहलुओं को विस्तार से समझते हैं।

गजानन संकष्टी चतुर्थी कब है?

  • गजानन संकष्टी चतुर्थी व्रत श्रावण कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर 02 अगस्त, 2026, रविवार को किया जाएगा।
  • चतुर्थी तिथि 01 अगस्त 2026, शनिवार को रात 11 बजकर 07 मिनट पर प्रारंभ होगी।
  • चतुर्थी तिथि का समापन 02 अगस्त 2026, रविवार को रात 11 बजकर 15 मिनट पर होगा।
  • संकष्टी के दिन चन्द्रोदय रात 09 बजकर 01 मिनट पर होगा।

इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु पूरे दिन उपवास रखते हैं और रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत खोलते हैं। चंद्र दर्शन इस व्रत का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है, क्योंकि इसके बिना व्रत अधूरा माना जाता है।

गजानन संकष्टी चतुर्थी के शुभ मुहूर्त

मुहूर्त

समय

ब्रह्म मुहूर्त

04:00 ए एम से 04:43 ए एम तक

प्रातः सन्ध्या

04:21 ए एम से 05:25 ए एम तक

अभिजित मुहूर्त

11:38 ए एम से 12:31 पी एम तक

विजय मुहूर्त

02:17 पी एम से 03:10 पी एम तक

गोधूलि मुहूर्त

06:43 पी एम से 07:04 पी एम तक

सायाह्न सन्ध्या

06:43 पी एम से 07:47 पी एम तक

अमृत काल

01:19 पी एम से 02:59 पी एम तक

निशिता मुहूर्त

11:43 पी एम से 12:26 ए एम, अगस्त 03 तक

विशेष योग

सर्वार्थ सिद्धि योग 

09:37 पी एम से 05:26 ए एम, अगस्त 03 तक

गजानन संकष्टी चतुर्थी क्या है?

गजानन संकष्टी चतुर्थी एक मासिक व्रत है, जो भगवान गणेश को समर्पित होता है। “संकष्टी” शब्द का अर्थ है - संकटों से मुक्ति दिलाने वाला।

इस दिन भगवान गणेश की पूजा विशेष रूप से की जाती है, क्योंकि उन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजा करता है, उसके जीवन से सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।

सावन मास में आने वाली यह चतुर्थी और भी अधिक प्रभावशाली मानी जाती है, क्योंकि इस समय प्रकृति और वातावरण दोनों ही आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर होते हैं।

हिंदू धर्म में गजानन संकष्टी चतुर्थी का महत्व

  • हिंदू धर्म में इस व्रत का अत्यधिक धार्मिक महत्व है। भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और सफलता का देवता माना गया है।
  • यह व्रत जीवन के सभी कष्टों और बाधाओं को दूर करता है
  • आर्थिक समस्याओं से मुक्ति दिलाता है
  • परिवार में सुख-शांति और समृद्धि लाता है
  • संतान की दीर्घायु और स्वास्थ्य के लिए विशेष लाभदायक माना जाता है
  • विशेष रूप से माताएं इस दिन अपनी संतान की सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए व्रत रखती हैं।

गजानन संकष्टी चतुर्थी का ज्योतिषीय महत्व

  • ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गजानन संकष्टी चतुर्थी का व्रत ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करने में सहायक होता है।
  • यह व्रत चंद्रमा को मजबूत करता है, जिससे मानसिक स्थिरता मिलती है
  • बुध ग्रह को बल प्रदान करता है, जिससे बुद्धि और निर्णय क्षमता बढ़ती है
  • राहु-केतु के दोषों को शांत करने में सहायक होता है
  • कुंडली में आने वाले विघ्न और बाधाओं को कम करता है
  • इस दिन किए गए मंत्र जाप और पूजा से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।

गजानन संकष्टी चतुर्थी का आध्यात्मिक महत्व

  • आध्यात्मिक दृष्टि से यह व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • यह व्यक्ति को आत्मिक शांति प्रदान करता है
  • मन को एकाग्र और स्थिर बनाता है
  • नकारात्मक विचारों को दूर करता है
  • ईश्वर के प्रति भक्ति और विश्वास को मजबूत करता है
  • इस दिन ध्यान, मंत्र जाप और भजन करने से व्यक्ति अपने भीतर की ऊर्जा को जागृत कर सकता है।

गजानन संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

धार्मिक रूप से यह दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा का अवसर है। सांस्कृतिक रूप से भी यह पर्व लोगों को एक साथ लाता है। मंदिरों में भजन, कीर्तन और कथा का आयोजन होता है। परिवार के सभी सदस्य मिलकर पूजा करते हैं, जिससे आपसी प्रेम और एकता बढ़ती है।

गजानन संकष्टी चतुर्थी से जुड़ी परंपराएं और मान्यताएं

  • इस व्रत से जुड़ी कई मान्यताएं प्रचलित हैं:
  • व्रत रखने से सभी कष्ट दूर होते हैं
  • चंद्र दर्शन के बिना व्रत पूर्ण नहीं होता
  • गणेश जी को दूर्वा और मोदक अत्यंत प्रिय हैं
  • इस दिन व्रत रखने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं
  • इन परंपराओं का पालन करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

गजानन संकष्टी चतुर्थी कैसे मनाई जाती है?

यह पर्व पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान किया जाता है और व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूरे दिन उपवास रखा जाता है और भगवान गणेश का ध्यान किया जाता है। शाम के समय पूजा की जाती है और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है।

गजानन संकष्टी चतुर्थी की तैयारी कैसे की जाती है?

  • इस दिन की तैयारी पहले से ही शुरू कर दी जाती है।
  • घर और पूजा स्थल की सफाई की जाती है
  • पूजा सामग्री एकत्रित की जाती है
  • व्रत का संकल्प लिया जाता है
  • मन और वातावरण को पवित्र बनाया जाता है
  • तैयारी जितनी अच्छी होगी, पूजा उतनी ही सफल मानी जाती है।

गजानन संकष्टी चतुर्थी पूजा सामग्री

  • पूजा के लिए आवश्यक सामग्री में शामिल हैं -
  • चौकी, लाल वस्त्र, गणेश जी की प्रतिमा, तांबे का कलश, गंगाजल, घी का दीपक, हल्दी, कुमकुम, अक्षत, चंदन, मौली, दूर्वा, फूल, तिल, तिल-गुड़ के लड्डू, फल, नारियल, धूप, कपूर और दक्षिणा।
  • इन सभी वस्तुओं का उपयोग पूजा को पूर्ण और सफल बनाने के लिए किया जाता है।

गजानन संकष्टी चतुर्थी व्रत की पूजा विधि

गजानन संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश को समर्पित अत्यंत पवित्र व्रत माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर गणपति बप्पा भक्तों के सभी कष्टों को दूर करते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। इसलिए इस व्रत की पूजा विधि को सही तरीके से करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

प्रातःकाल की तैयारी

  • व्रत की शुरुआत सुबह से ही होती है, इसलिए इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • सबसे पहले प्रातः जल्दी उठें और नित्य कर्मों से निवृत्त हों
  • इसके बाद स्नान करके आप शरीर एवं मन दोनों को अच्छे से शुद्ध करें
  • साफ और पवित्र वस्त्र धारण करें (संभव हो तो हल्के या पीले/सफेद रंग के)
  • पूजा स्थान को साफ करें और वहां गंगाजल का छिड़काव करें
  • इसके बाद भगवान गणेश का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें:
  • “ॐ गं गणपतये नमः, मैं आज संकष्टी चतुर्थी का व्रत पूर्ण श्रद्धा से कर रहा/रही हूँ।”

व्रत का संकल्प और नियम

  • पूरे दिन व्रत रखें (फलाहार या निर्जल व्रत अपनी क्षमता अनुसार)
  • मन, वाणी और व्यवहार को शुद्ध रखें
  • किसी भी प्रकार के क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहें
  • दिनभर भगवान गणेश का स्मरण करते रहें

पूजा स्थल की स्थापना

संध्या समय पूजा की तैयारी करें:

  • एक साफ स्थान पर चौकी रखें
  • चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं
  • भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें
  • पास में तांबे का कलश जल से भरकर रखें

गणेश जी का आवाहन और पूजन

अब विधिपूर्वक पूजा प्रारंभ करें:

  • सबसे पहले दीपक जलाएं
  • गंगाजल से भगवान गणेश को शुद्ध करें (छिड़काव करें)
  • भगवान को आसन के रूप में अक्षत अर्पित करें
  • हल्दी, कुमकुम और चंदन से तिलक करें
  • दूर्वा और फूल अर्पित करें (गणेश जी को दूर्वा विशेष प्रिय है)

भोग अर्पण

  • गणेश जी को तिल-गुड़ के लड्डू, मोदक, फल और नारियल अर्पित करें
  • धूप और दीप दिखाएं
  • अपनी श्रद्धा अनुसार दक्षिणा अर्पित करें

मंत्र जाप और व्रत कथा

  • पूजा के दौरान गणेश मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है: “ॐ गं गणपतये नमः” “वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ”
  • इसके बाद संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का पाठ करें। यह कथा सुनने और पढ़ने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

आरती

  • अब भगवान गणेश की आरती करें:
  • “जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा…”
  • आरती के समय पूरे परिवार के साथ भक्ति भाव से भगवान का गुणगान करें।

चन्द्रमा को अर्घ्य देना (पारण विधि)

  • गजानन संकष्टी चतुर्थी का सबसे महत्वपूर्ण भाग चन्द्र दर्शन है।
  • रात में चंद्रमा के निकलने पर एक तांबे के कलश में जल और दूध मिलाएं
  • उसमें पुष्प और अक्षत डालें
  • चंद्रमा को अर्घ्य दें
  • चंद्रदेव से प्रार्थना करें कि जीवन के सभी कष्ट दूर हों
  • चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलें
  • पहले प्रसाद ग्रहण करें
  • इसके बाद सात्विक भोजन करें
  • गजानन संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से भगवान गणेश अत्यंत प्रसन्न होते हैं। यह व्रत जीवन के सभी संकटों को दूर कर सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करता है।

यदि इस दिन सच्चे मन से पूजा की जाए, तो गणपति बप्पा अपने भक्तों की हर मनोकामना अवश्य पूर्ण करते हैं।

गजानन संकष्टी चतुर्थी में किए जाने वाले पवित्र कार्य

इस दिन किए गए पवित्र कार्य अत्यंत फलदायी होते हैं:

  • मंत्र जाप और ध्यान
  • भजन-कीर्तन
  • दान-पुण्य
  • गौ सेवा
  • जरूरतमंदों की सहायता
  • ये कार्य व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं।

गजानन संकष्टी चतुर्थी के दिन किए जाने वाले शुभ कार्य

  • इस दिन कुछ विशेष कार्य करना बहुत शुभ माना जाता है:
  • गणेश मंत्र का जाप
  • मंदिर में दर्शन
  • अन्न और वस्त्र दान
  • परिवार के साथ पूजा
  • सकारात्मक सोच और व्यवहार

गजानन संकष्टी चतुर्थी पर 5 उपाय

इस दिन किए गए उपाय अत्यंत प्रभावशाली होते हैं:

  • सुख-शांति के लिए - गणेश जी को गुलाब अर्पित करें, इससे घर में प्रेम और शांति बनी रहती है।
  • मान-सम्मान के लिए - तिल का दान करें, इससे समाज में प्रतिष्ठा बढ़ती है।
  • मनोकामना पूर्ति के लिए - रोली और चंदन अर्पित करें, इससे इच्छाएं पूर्ण होती हैं।
  • करियर उन्नति के लिए - रुद्राक्ष धारण करें, इससे सफलता मिलती है।
  • समस्याओं से मुक्ति के लिए - तिल-गुड़ के लड्डू का भोग लगाएं, इससे जीवन की परेशानियां दूर होती हैं।

गजानन संकष्टी चतुर्थी का व्रत अत्यंत शक्तिशाली और फलदायी माना जाता है। यह व्रत न केवल आपके जीवन के कष्टों को दूर करता है, बल्कि आपको मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति भी प्रदान करता है।

यदि इस दिन सच्चे मन और श्रद्धा के साथ भगवान गणेश की पूजा की जाए, तो वे अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं और उनकी हर मनोकामना को पूर्ण करते हैं। हम प्रार्थना करते हैं कि भगवान गणेश आपकी सभी बाधाओं को दूर करें और आपके जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता प्रदान करें।

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Published by Sri Mandir·May 28, 2026

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