चंद्रग्रहण 2026 में कब है?
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चंद्रग्रहण 2026 में कब है?

चंद्रग्रहण 2026 में कब है? जानिए 2026 के सभी चंद्रग्रहण की सटीक तिथि, भारत में समय, सूतक काल और राशियों पर प्रभाव पूरी जानकारी एक ही जगह।

चंद्रग्रहण के बारे में

साल का पहला चंद्रग्रहण लग रहा है ऐसे में कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां बरतनी चाहिए। चंद्रग्रहण के समय क्या करें और क्या न करें यह जानना आवश्यक है। तो इस लेख में जानिए ग्रहण के दौरान कौन से धार्मिक उपाय करें और किन गतिविधियों से बचें ताकि नकारात्मक प्रभाव से बचा जा सके और सकारात्मकता बनी रहे।

चंद्रग्रहण 2026 में कब है?

2026 में पहला खग्रास चंद्रग्रहण 3 मार्च को होगा। यह ग्रहण 1.14 परिमाण का होगा और इसकी समग्रता का समय 57 मिनट और 27 सेकंड रहेगा।

चंद्रग्रहण का समय

  • चन्द्रग्रहण प्रारम्भ (चन्द्रोदय के साथ): 06:26 पीएम
  • चन्द्रग्रहण समाप्त: 06:46 पीएम

ग्रहण के विभिन्न चरणों का समय

  • उपच्छाया से पहला स्पर्श: 02:16 पीएम
  • प्रच्छाया से पहला स्पर्श: 03:21 पीएम
  • खग्रास प्रारम्भ: 04:35 पीएम
  • परमग्रास चन्द्र ग्रहण: 05:04 पीएम
  • खग्रास समाप्त: 05:33 पीएम
  • प्रच्छाया से अन्तिम स्पर्श: 06:46 पीएम
  • उपच्छाया से अन्तिम स्पर्श: 07:52 पीएम

ग्रहण की कुल अवधि

  • खग्रास की अवधि: 57 मिनट 27 सेकंड्स
  • खण्डग्रास की अवधि: 3 घंटे 25 मिनट 17 सेकंड्स
  • उपच्छाया की अवधि: 5 घंटे 35 मिनट 45 सेकंड्स

ग्रहण का परिमाण

  • खग्रास चन्द्र ग्रहण का परिमाण: 1.14
  • उपच्छाया चन्द्र ग्रहण का परिमाण: 2.18

सूतक समय

  • सूतक प्रारम्भ: 09:39 एम
  • सूतक समाप्त: 06:46 पीएम
  • बच्चों, बृद्धों और अस्वस्थ लोगों के लिये सूतक प्रारम्भ: 03:28 पीएम
  • बच्चों, बृद्धों और अस्वस्थ लोगों के लिये सूतक समाप्त: 06:46 पीएम

चंद्रग्रहण क्या है

चंद्रग्रहण एक खगोलीय घटना है, जिसमें पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इसे हिन्दू धर्म में एक धार्मिक घटना माना जाता है, जिसका विशेष महत्व होता है। जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया के भीतर पूरी तरह या आंशिक रूप से आ जाता है तो यह चंद्रग्रहण कहलाता है। चंद्रग्रहण का यह समय अक्सर लगभग 4-6 घंटे तक चलता है, जिसमें कुछ समय पूर्ण चंद्रग्रहण और कुछ समय उपच्छाया चंद्रग्रहण होता है।

चंद्रग्रहण क्यों होता है

चंद्रग्रहण तब होता है जब पृथ्वी अपनी पूरी छाया (प्रच्छाया) या आंशिक छाया (उपच्छाया) को चंद्रमा पर डालती है। यह घटना हमेशा पूर्णिमा के दिन होती है, क्योंकि पूर्णिमा के समय चंद्रमा और सूर्य पृथ्वी के एक ही रेखा में होते हैं। चंद्रग्रहण का कारण पृथ्वी द्वारा सूर्य के प्रकाश को अवरुद्ध करना है। जब पृथ्वी अपने मार्ग में चंद्रमा के सामने आती है तो चंद्रमा पर सूर्य की रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल से परावर्तित होकर पड़ती है और चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देता है। इसे "ब्लड मून" भी कहते हैं।

सूतक काल क्या होता है

सूतक काल एक निश्चित समयावधि होती है, जो ग्रहण से पहले मानी जाती है। हिन्दू धार्मिक परंपराओं में सूतक को एक अशुभ समय माना जाता है, जिसमें पृथ्वी का वातावरण दूषित हो जाता है। इस समय के दौरान विशेष सावधानियां रखनी जाती हैं, ताकि किसी भी तरह के नकारात्मक प्रभाव से बचा जा सके। सूतक काल का पालन मुख्य रूप से सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के समय किया जाता है।

सूतक काल का समय ग्रहण के प्रकार पर निर्भर करता है। सूतक काल में खानपान से संबंधित विशेष निर्देश होते हैं। इस समय के दौरान ठोस या तरल खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। जानकारी के अनुसार, विशेष रूप से, सूर्य ग्रहण से 12 घंटे और चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले से ग्रहण समाप्त होने तक भोजन करना वर्जित होता है। हालांकि, बच्चों, वृद्धों और अस्वस्थ व्यक्तियों के लिए सूतक काल के दौरान केवल एक प्रहर (3 घंटे) के लिए भोजन से परहेज करना जरूरी है। सूतक काल केवल उन्हीं स्थानों पर माना जाता है, जहां ग्रहण दिखाई देता है। अगर किसी स्थान पर ग्रहण दृष्टिगोचर नहीं होता, तो वहां सूतक का पालन नहीं किया जाता

कहां-कहां दिखेगा प्रभाव

यह चंद्रग्रहण भारत सहित कई देशों में दिखाई देगा। भारत के प्रमुख शहरों में जैसे नई दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद, भुवनेश्वर, पटना, गुवाहाटी, इम्फाल, शिलांग, कोहिमा, और ईटानगर, चंद्रग्रहण विभिन्न अवस्थाओं में दिखाई देगा। वहीं, पूरा चंद्रग्रहण (खग्रास) पूर्वी एशिया, दक्षिण-पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर, उत्तर अमेरिका के अधिकांश हिस्से, और दक्षिण अमेरिका के कुछ उत्तरी हिस्से में चंद्रमा पृथ्वी की प्रच्छाया में पूरी तरह से ढका हुआ दिखाई देगा और यहां खग्रास चंद्रग्रहण का दृश्य स्पष्ट रूप से दिखेगा।

चंद्रग्रहण के क्या प्रभाव होते हैं?

धार्मिक दृष्टिकोण से, चंद्रग्रहण को अशुभ समय माना जाता है और इसके दौरान कुछ विशेष सावधानियां बरती जाती हैं। हिन्दू मान्यता के अनुसार, ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा फैलने का खतरा होता है, जिससे विशेष रूप से प्राचीन ग्रंथों में ग्रहण के दौरान पूजा, व्रत और अन्य धार्मिक कर्मकांडों को रोकने का निर्देश दिया जाता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, चंद्रग्रहण का मानव शरीर पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं होता। यह एक प्राकृतिक घटना है, जिसका कोई शारीरिक असर नहीं होता। हालांकि, इसका धार्मिक महत्व बहुत अधिक होता है।खासकर ग्रहण के दौरान विशेष ध्यान और ध्यान रखने की परंपरा का पालन किया जाता है।

चंद्रग्रहण के दिन किए जाने वाले धार्मिक उपाय

चंद्रग्रहण के दिन कई धार्मिक उपाय किए जाते हैं, जो सकारात्मक फल प्राप्त करने के लिए माने जाते हैं। इन उपायों का पालन करने से ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव से बचने के साथ-साथ जीवन में सुख और शांति का वास होता है।

मंत्र का जाप: चंद्रग्रहण के दौरान विशेष मंत्रों का जाप करना बहुत लाभकारी माना गया है। ॐ सोमाय नमः, ॐ चंद्राय नमः और महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी किया जा सकता है। इन मंत्रों का जाप करने से चंद्रग्रहण के प्रभाव से बचने के साथ-साथ शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

दान करेंः चंद्रग्रहण के बाद दान करना बेहद शुभ माना जाता है। सफेद चीजों का दान जैसे चावल, चीनी, दूध या चांदी करना चाहिए, जो चंद्रग्रहण के समाप्त होने के बाद किया जाता है।

ध्यान और साधना: ग्रहण का समय ध्यान, साधना, और आत्मचिंतन के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। यह समय मानसिक शांति और आंतरिक बल को बढ़ाने के लिए उत्तम है। ग्रहण के दौरान ध्यान करने से मन की स्थिरता बढ़ती है और आत्मा को शांति मिलती है।

चंद्रग्रहण के दौरान ध्यान रखने वाली बातें

चंद्रग्रहण के समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है। यह धार्मिक और शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के समय की अनुष्ठानिक परंपराओं का पालन करने से न केवल नकारात्मक प्रभाव से बचाव होता है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का भी संचार होता है।

गर्भवती स्त्रियों के लिए सावधानिया: चंद्रग्रहण के दौरान गर्भवती स्त्रियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि ग्रहण के समय शिशु पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिससे शारीरिक दोष हो सकते हैं। गर्भवती महिलाएं ग्रहण के समय किसी भी प्रकार का कार्य जैसे सिलाई, वस्त्र काटना आदि नहीं करना चाहिए।

प्रतिबंधित गतिविधियांः चंद्रग्रहण के दौरान कुछ गतिविधियां प्रतिबंधित मानी जाती हैं, जिनसे बचना चाहिए। तेल मालिश, जल ग्रहण, मल-मूत्र विसर्जन, बालों में कंघी करना, मंजन या दातुन करना जैसे कार्य ग्रहण के समय नहीं करना चाहिए। यौन गतिविधियों में भी लिप्त होना प्रतिबंधित होता है, क्योंकि यह समय शारीरिक और मानसिक शांति बनाए रखने का होता है। इन गतिविधियों से बचने से ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव से बचाव होता है। ग्रहण के दौरान विशेष श्लोक जैसे "तमोमय महाभीम सोमसूर्यविमर्दन" का जाप करने से मानसिक शांति और सुख की प्राप्ति होती है।

चंद्रग्रहण के दिन क्या करें

तुलसी या कुश रखेंः ग्रहण से पहले तुलसी की पत्ती या कुश भोजन में डालने की परंपरा है। यह माना जाता है कि इससे भोजन में कोई अशुद्धि नहीं होती। इनका उपयोग करने से ग्रहण के दुष्प्रभाव से बचाव होता है और शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। स्‍नान जरूर करेंः चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें, जिससे घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है और सकारात्मक वातावरण बनता है। दीपक दान: चंद्रग्रहण के दिन दीप दान करना शुभ माना जाता है। विशेष रूप से, पवित्र नदियों में मिट्टी के दीपक जलाकर प्रवाहित करने से चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता का प्रवाह होता है। अन्न का दान: चंद्रग्रहण के दिन अन्न का दान करना बेहद पुण्यकारी माना जाता है। आप जरूरतमंदों को पका हुआ भोजन दे सकते हैं या कच्चा अनाज जैसे चावल, गेहूं आदि दान कर सकते हैं।

चंद्रग्रहण के दिन क्या न करें

पूजा या मांगलिक कार्य न करें: ग्रहण के समय कोई भी पूजा या मांगलिक कार्य नहीं किया जाता। सूतक काल के दौरान घर के मंदिर के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं और किसी भी प्रकार के शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। खाना न खाएं: चंद्रग्रहण के समय पहले से बने हुए खाने को नहीं खाना चाहिए। ग्रहण के दौरान यात्रा न करें: ग्रहण के समय यात्रा नहीं करना चाहिए। क्योंकि ग्रहण के समय वातावरण में बदलाव होता है जो यात्रा के लिए अनुकूल नहीं होता।

ग्रहण के बारे में और अधिक जानकारी के लिए किसी संबंधित विशेषज्ञ या पंडित से उचित मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।

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Published by Sri Mandir·February 24, 2026

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