भाद्रपद माह प्रारंभ कब होता है?
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भाद्रपद माह प्रारंभ कब होता है?

क्या आप जानना चाहते हैं कि भाद्रपद माह कब शुरू होता है और इसका धार्मिक महत्व क्या है? इस लेख में जानिए भाद्रपद माह की शुरुआत की तिथि, इसमें आने वाले प्रमुख पर्व, व्रत और पूजा विधि की पूरी जानकारी।

भाद्रपद माह के बारे में

धार्मिक दृष्टि से भाद्रपद मास का विशेष महत्व माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह वर्ष का छठा महीना और चातुर्मास का दूसरा महीना होता है। यह पवित्र समय भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्री गणेश की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। जैसे सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है, उसी प्रकार भाद्रपद मास भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित माना जाता है।

भाद्रपद माह प्रारंभ कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास की शुरुआत कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। वर्ष 2026 में यह पवित्र माह 29 अगस्त, शनिवार से आरंभ होगा। इस दिन से भादों महीने की शुरुआत मानी जाएगी, जो धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण होता है।

भाद्रपद माह प्रारंभ क्या है?

भाद्रपद माह का आरंभ एक ऐसे पवित्र समय की शुरुआत माना जाता है, जो व्रत, उपवास और नियमों के पालन के लिए विशेष होता है। ‘भाद्रपद’ का अर्थ ही है—शुभ फल देने वाला महीना। इस समय व्यक्ति अपने जीवन को सुधारने, गलतियों का प्रायश्चित करने और मन को शुद्ध करने का प्रयास करता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह वर्ष का छठा महीना होता है और धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस माह में भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण, गणेश जी और भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि पूरे महीने भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार इस दौरान सूर्य सिंह राशि में स्थित होता है, जिससे इस माह का महत्व और बढ़ जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह महीना अगस्त और सितंबर के बीच आता है। धर्म ग्रंथों में बताया गया है कि भाद्रपद माह में पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और व्रत करने से विशेष फल प्राप्त होता है। इसलिए इस माह की शुरुआत एक आध्यात्मिक और पवित्र जीवन की ओर कदम बढ़ाने का संकेत मानी जाती है।

भाद्रपद प्रारंभ का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

भाद्रपद माह का समय भक्ति, साधना और आत्मशुद्धि का प्रतीक होता है। इस महीने की शुरुआत के साथ ही लोग व्रत, उपवास और पूजा-पाठ में अधिक ध्यान देते हैं, जिससे मन और जीवन दोनों में सकारात्मक बदलाव आता है।

धार्मिक दृष्टि से यह महीना भगवान श्रीकृष्ण, भगवान गणेश और भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष होता है। इसी माह में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, राधा अष्टमी और अनंत चतुर्दशी जैसे बड़े पर्व मनाए जाते हैं, जो भक्तों में श्रद्धा और उत्साह भर देते हैं।

सांस्कृतिक रूप से भी भाद्रपद का विशेष महत्व है। इस दौरान कई पारंपरिक त्योहार, लोकगीत, और रीति-रिवाज देखने को मिलते हैं। घरों और मंदिरों में पूजा-अर्चना होती है, महिलाएं व्रत रखती हैं और समाज में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसके अलावा, इस महीने में दान-पुण्य, पवित्र नदियों में स्नान और जरूरतमंदों की सहायता करना बहुत फलदायी माना जाता है।

भाद्रपद प्रारंभ से जुड़ी परंपराएं और मान्यताएं

  • भाद्रपद माह की शुरुआत के साथ ही कई धार्मिक नियम और परंपराएं अपनाई जाती हैं। यह महीना भक्ति, संयम और सात्विक जीवन जीने का संदेश देता है, इसलिए खान-पान और दिनचर्या में विशेष सावधानी रखी जाती है।
  • इस माह में कुछ चीजों के सेवन से बचने की मान्यता है। जैसे गुड़, दही और उनसे बनी वस्तुएं, क्योंकि इन्हें खाने से स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा जैसे तामसिक भोजन से दूर रहने की सलाह दी जाती है, ताकि मन शुद्ध और शांत बना रहे।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान दूसरों का दिया हुआ चावल या नारियल तेल उपयोग करना शुभ नहीं माना जाता। रविवार के दिन बाल कटवाना और नमक का सेवन करना भी कुछ जगहों पर अशुभ माना जाता है। इसके अलावा, कच्चे और ठंडे खाद्य पदार्थों से परहेज रखने की परंपरा है।
  • भाद्रपद माह में स्नान और दान का विशेष महत्व बताया गया है। प्रतिदिन स्वच्छ जल से स्नान करना और जरूरतमंदों की सहायता करना पुण्यदायक माना जाता है। पवित्र नदियों में स्नान करने से भी विशेष फल मिलता है।
  • इस महीने भगवान श्रीकृष्ण और भगवान गणेश की पूजा का खास महत्व होता है। श्रीकृष्ण को पंचामृत से स्नान कराना और जन्माष्टमी का उत्सव मनाना शुभ माना जाता है। वहीं गणेश चतुर्थी के अवसर पर गणेश जी की स्थापना कर, उन्हें दूर्वा और मोदक का भोग लगाया जाता है।
  • इसके अलावा, श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करना, घर में लड्डू गोपाल और शंख की स्थापना करना भी शुभ माना गया है। इन सभी परंपराओं का उद्देश्य जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाना होता है।

भाद्रपद प्रारंभ कैसे मनाया जाता है?

  • इस पवित्र महीने में लोग भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और अपने जीवन में सकारात्मकता लाने का प्रयास करते हैं।
  • भाद्रपद प्रारंभ होने पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो गंगा स्नान किया जाता है, लेकिन गंगा न जा पाने पर किसी पवित्र नदी या घर में गंगाजल मिलाकर स्नान करने की परंपरा भी है।
  • इस महीने में भगवान श्रीकृष्ण को तुलसी दल, माखन और मिश्री अर्पित की जाती है। साथ ही तुलसी के जल का सेवन करना भी शुभ माना जाता है।
  • भाद्रपद माह में सात्विक भोजन करने का विशेष महत्व होता है। लोग तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज से दूरी बनाकर रखते हैं।
  • इसके अलावा, इस महीने में दान-पुण्य करना, जरूरतमंदों की सहायता करना और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।
  • भक्त पूरे महीने भजन-कीर्तन, मंत्र जाप और पूजा-पाठ में अधिक समय बिताते हैं। कई लोग घरों में श्रीकृष्ण और गणेश जी की विशेष पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

भाद्रपद प्रारंभ की तैयारी कैसे की जाती है?

  • भाद्रपद माह शुरू होने से पहले लोग घर की साफ-सफाई करते हैं और मन को सकारात्मक एवं शांत रखने का प्रयास करते हैं।
  • घर के मंदिर और पूजा स्थान को फूलों, दीपक और सजावटी वस्तुओं से सुंदर बनाया जाता है।
  • कई भक्त मंदिर जाकर भगवान श्रीकृष्ण और गणेश जी के दर्शन करते हैं तथा पूजा सामग्री पहले से एकत्र कर लेते हैं।
  • तुलसी दल, फूल, धूप, दीप, माखन-मिश्री, फल और अन्य आवश्यक पूजा सामग्री की व्यवस्था की जाती है।
  • कुछ लोग पूरे महीने या विशेष तिथियों पर व्रत रखने और नियमों का पालन करने का संकल्प लेते हैं।
  • इस महीने में लोग तामसिक भोजन से दूरी बनाकर फल, दूध और हल्के सात्विक भोजन का सेवन शुरू करते हैं।
  • भाद्रपद माह में प्रतिदिन स्नान, मंत्र जाप, भजन-कीर्तन और धार्मिक ग्रंथों के पाठ का नियम बनाया जाता है।
  • गणेश चतुर्थी और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी जैसे त्योहारों के लिए घरों में पहले से सजावट और पूजा की योजनाएं बनाई जाती हैं।
  • जरूरतमंदों की सहायता करना, भोजन दान देना और धार्मिक कार्यों में भाग लेना भी इस माह की तैयारी का महत्वपूर्ण भाग माना जाता है।

भाद्रपद प्रारंभ में किए जाने वाले पवित्र कार्य

भाद्रपद माह का आरंभ केवल एक नए महीने की शुरुआत नहीं, बल्कि भक्ति, सकारात्मकता और आध्यात्मिक ऊर्जा के आगमन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस पवित्र समय में किए गए शुभ कार्य व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आते हैं। इसलिए भक्त पूरे श्रद्धा भाव से पूजा-पाठ, व्रत, दान और भगवान की आराधना में मन लगाते हैं।

इस माह में सुबह जल्दी उठकर स्नान करना, भगवान श्रीकृष्ण और गणेश जी की पूजा करना, तुलसी अर्पित करना, मंत्र जाप और भजन-कीर्तन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही पवित्र नदियों में स्नान, जरूरतमंदों को दान और सात्विक जीवन अपनाने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। भाद्रपद का यह पावन समय मन को शुद्ध करने, अच्छे कर्मों की ओर बढ़ने और भगवान की कृपा प्राप्त करने का सुंदर अवसर माना जाता है।

भाद्रपद प्रारंभ का ज्योतिषीय महत्व

वैदिक ज्योतिष में भाद्रपद माह का प्रारंभ बहुत शुभ और प्रभावशाली माना जाता है। यह समय साधना, पूजा-पाठ और आत्मचिंतन के लिए अनुकूल माना जाता है। चातुर्मास का दूसरा महीना होने के कारण इस अवधि में धार्मिक कार्यों का महत्व और बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस समय किए गए जप, तप, दान और व्रत का कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है।

ज्योतिषीय दृष्टि से भाद्रपद का समय मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करने वाला माना गया है। इस माह में ग्रहों की स्थिति व्यक्ति को भक्ति और धर्म की ओर प्रेरित करती है। इसलिए लोग इस दौरान व्रत, उपवास और पूजा-अर्चना में अधिक ध्यान देते हैं।

भाद्रपद माह में कजरी तीज, अजा एकादशी, हरतालिका तीज, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और गणेश चतुर्थी जैसे महत्वपूर्ण पर्व आते हैं, जिनका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व विशेष माना गया है।

हिंदू धर्म में भाद्रपद प्रारंभ का महत्व

हिंदू धर्म में भाद्रपद माह की शुरुआत को बहुत शुभ और पवित्र माना जाता है। इस माह के आरंभ के साथ ही धार्मिक गतिविधियां, पूजा-अर्चना और व्रतों का विशेष महत्व बढ़ जाता है। यह समय मन को शुद्ध करने और भगवान की भक्ति में लीन होने का अवसर माना जाता है। भाद्रपद का प्रारंभ भक्तों के लिए खास इसलिए भी होता है क्योंकि इसी माह में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और गणेश चतुर्थी जैसे प्रमुख पर्व आते हैं। लोग भगवान श्रीकृष्ण और गणेश जी की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने में श्रद्धा से पूजा-पाठ, दान और अच्छे कार्य करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। भगवान श्रीकृष्ण को तुलसी और माखन अर्पित करना भी बहुत शुभ माना जाता है। इसके अलावा, भाद्रपद माह में पवित्र नदियों में स्नान और जरूरतमंदों की सहायता करने का भी विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इस माह में किए गए सत्कर्म जीवन में शांति, समृद्धि और सौभाग्य लेकर आते हैं।

भाद्रपद प्रारंभ का आध्यात्मिक महत्व

भाद्रपद माह का आरंभ आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह समय भगवान श्रीकृष्ण और भगवान गणेश की भक्ति के लिए श्रेष्ठ माना गया है। मान्यता है कि इस माह में सच्चे मन से पूजा और भक्ति करने से व्यक्ति को मानसिक शांति और भगवान की कृपा प्राप्त होती है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के कारण यह महीना भगवान कृष्ण की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। वहीं गणेश चतुर्थी के दौरान भगवान गणेश की पूजा करने से बुद्धि, सफलता और शुभ फल प्राप्त होने की मान्यता है। इस माह में पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य, मंत्र जाप और धार्मिक साधना को अत्यंत फलदायी माना गया है। साथ ही पितृ पक्ष की शुरुआत भी इसी अवधि में होती है, जिसमें लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और श्रद्धा कर्म करते हैं।

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Published by Sri Mandir·June 17, 2026

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