अट्टुकल पोंगल कब है 2026
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अट्टुकल पोंगल कब है 2026

क्या आप जानना चाहते हैं कि अट्टुकल पोंगल 2026 में कब है और इसका धार्मिक महत्व क्या है? इस लेख में जानिए सही तिथि, पूजा-विधि, पोंगल अर्पण की परंपरा, केरल में मनाए जाने वाले इस विशाल महिला उत्सव का महत्व और मां Attukal Bhagavathy की कृपा पाने के विशेष उपाय – सब कुछ सरल और स्पष्ट भाषा में।

अट्टुकल पोंगल के बारे में

अट्टुकल पोंगल दक्षिण भारत का एक प्रमुख और लोकप्रिय त्योहार है। इस त्योहार के दौरान कई धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां होती हैं, जिनमें पूजा, भक्ति गीत और विशेष रूप से प्रसाद वितरण शामिल होता है। यह त्योहार अपने उल्लास और धार्मिक महत्व के कारण खास है। इस लेख में हम अट्टुकल पोंगल के बारे में विस्तार से जानेंगे और समझेंगे कि यह क्यों खास है।

अट्टुकल पोंगल कब है

  • अट्टुकल पोंगल 2026 में मंगलवार, 3 मार्च को मनाया जाएगा।
  • यह त्योहार मलयालम कैलेंडर के अनुसार कुम्भम माह में आता है।
  • इस दिन पूरम् नक्षत्र का प्रारंभ 3 मार्च, 2026 को सुबह 07:31 बजे होगा और समाप्ति 4 मार्च, 2026 को सुबह 07:39 बजे होगी।

हालांकि वास्तविक दिन में एक दिन का अंतर हो सकता है। क्योंकि मन्दिर के उत्सव स्थानीय कैलेंडर और कभी-कभी ज्योतिषियों के अनुसार निर्धारित होते हैं। इसके लिए एक बार अपने विशेष जानकार या पंडित से जानकारी ले सकते हैं।

अट्टुकल पोंगल का इतिहास

जानकारी के अनुसार, यह त्योहार विशेष रूप से कण्णगी, जो सिलप्पथिकारम महाकाव्य की नायिका हैं, से जुड़ा हुआ है। कण्णगी के पति को मदुरै के शासक ने रानी की अंगूठी चुराने के आरोप में मृत्युदंड दिया था, लेकिन कण्णगी ने अपने पति की निर्दोषिता को प्रमाणित किया। वह अपने पति को न्याय दिलाने के बाद अट्टुकल में आकर देवी के रूप में प्रतिष्ठित हुईं। देवी अट्टुकलाम्मा कण्णगी का ही रूप हैं और उनके मंदिर में इस दिन विशेष पूजा होती है।

अट्टुकल पोंगल से जुड़ी मान्यता

जानकारी के अनुसरा, यह मान्यता है कि देवी अट्टुकलाम्मा ने एक वृद्ध पुरुष के सपने में आकर उसे बताया कि वह तीन रेखाएं खींचकर वहां निवास करना चाहती हैं। इसके बाद, वह वृद्ध व्यक्ति उस स्थान पर गया और तीन निशान पाए, जिनके आधार पर उसने एक छोटा सा मंदिर बनाया। समय के साथ, देवी की कृपा से यह स्थान समृद्धि का केंद्र बन गया और लोगों ने इस मंदिर को विस्तार दिया, जिससे आज अट्टुकल भगवती मंदिर की वर्तमान स्थिति प्राप्त हुई।

अट्टुकल पोगल के उत्सव और परंपरा

अट्टुकल पोंगल के आयोजन का आरंभ मलयालम कैलेंडर के मकरम् या कुम्भम् माह के कार्तिगई नक्षत्र से होता है। इस महोत्सव की शुरुआत 'थोट्टमपट्टु' (भगवती के बारे में गीत) से होती है। अंतिम दिन जब अट्टुकल पोंगल महोत्सव होता है, जहां हजारों महिलाएं मंदिर में एकत्रित होती हैं और पोंगला पकाने की शुरुआत करती हैं। इस अनुष्ठान में मुख्य पुजारी देवी के तलवार के साथ पूजा करते हुए महिलाओं को आशीर्वाद देते हैं और पवित्र जल छिड़कते हैं। पूजा के बाद, महिलाएं तैयार पोंगला घर ले जाती हैं।

उसके बाद, देवी की मूर्ति को मनाकौड शास्ता मंदिर की ओर एक रंगीन जुलूस में ले जाया जाता है, जिसमें थलपोली, कूथीओट्टम, अन्नम, वाहनम और हाथी शामिल होते हैं और संगीतकार कलाकारों द्वारा संगीत भी बजाया जाता है। श्रद्धालु इस जुलूस का स्वागत 'निरापारा' (चावल से भरा हुआ पात्र और फूलों से सजाया गया) से करते हैं। जुलूस अगले दिन सुबह मंदिर लौटता है, जो महोत्सव के समापन का संकेत है। इस उत्सव का समापन रात को कुरुथी तर्पणम नामक बलि अनुष्ठान के साथ होता है। इस उत्सव के नवम दिवस पर अट्टुकल पोंगल महोत्सव मनाया जाता है। वहीं, जानकारी के अनुसार, यह त्योहार भगवान शिव की पत्नी देवी पार्वती के अवतार कण्णगी की पूजा के रूप में मनाया जाता है।

महिलाओं का योगदान और विशेष पूजा

अट्टुकल पोंगल को एक महिला केंद्रित त्योहार माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से महिलाएं पोंगला (एक प्रकार का पकवान) जिसमें चावल, गुड़, नारियल, मेवे और किशमिश मिलाकर एक खीर बनाई जाती है, जो देवी को अर्पित की जाती है। इस दिन महिलाएं अपनी श्रद्धा के साथ देवी अट्टुकलम्मा से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इस महोत्सव में भाग लेती हैं। इसके अलावा अट्टुकल पोंगल के दौरान तिरुवनंतपुरम शहर की सड़कें श्रद्धालुओं से भर जाती हैं और पूरे शहर में उत्साह और श्रद्धा का माहौल होता है। हजारों महिलाएं मिट्टी के बर्तनों में पोंगला तैयार करती हैं और देवी को अर्पित करती हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्ति और आस्था से रंग जाता है।

उत्सव का वैश्विक आकर्षण

यह पर्व एक अद्वितीय अनुभव है, जो अपनी भव्यता और विशिष्टता के लिए जाना जाता है। इस विशाल महोत्सव में भाग लेकर लोग न केवल देवी अट्टुकलम्मा की पूजा करते हैं, बल्कि इस अद्वितीय सांस्कृतिक आयोजन का हिस्सा बनने का भी अनुभव प्राप्त करते हैं।

अट्टुकल पोंगल का विश्व रिकॉर्ड

अट्टुकल पोंगल महोत्सव की भव्यता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 1997 और 2009 में यह महोत्सव क्रमशः 15 लाख और 25 लाख महिलाओं के साथ विश्व का सबसे बड़ा महिला सम्मेलन बन चुका है। अट्टुकल पोंगल की भव्यता और धार्मिक महत्त्व ने इसे एक ऐतिहासिक और अद्वितीय उत्सव बना दिया है।

निष्कर्ष

अट्टुकल पोंगल न केवल एक धार्मिक त्योहार है, बल्कि यह केरल और तमिलनाडु के महिलाओं के बीच एकता और शक्ति का प्रतीक भी है। यह महोत्सव देवी अट्टुकलाम्मा की पूजा और उनके आशीर्वाद के लिए मनाया जाता है, जो जीवन में समृद्धि और खुशहाली लाने के लिए प्रमुख मानी जाती हैं।

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Published by Sri Mandir·March 5, 2026

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