आंशिक चंद्र ग्रहण कब है?
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आंशिक चंद्र ग्रहण कब है?

क्या आप जानना चाहते हैं कि आंशिक चंद्र ग्रहण कब लगेगा और इसका क्या महत्व है? इस लेख में जानिए चंद्र ग्रहण का समय, सूतक काल, धार्मिक मान्यताएँ, वैज्ञानिक कारण और इसे देखने से जुड़े जरूरी नियमों की पूरी जानकारी।

आंशिक चंद्र ग्रहण के बारे में

चंद्र ग्रहण के बारे में तो आपने सुना ही होगा, लेकिन क्या आप आंशिक चंद्र ग्रहण के बारे में जानते हैं जो इस साल लगने वाला है। अगर नहीं जानते तो इस लेख में आंशिक चंद्र ग्रहण के बारे में जानिए सब कुछ...

आंशिक चंद्र ग्रहण कब है?

आंशिक चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को लगेगा। यह ग्रहण सुबह 06:53 से दोपहर 12:31 तक रहेगा। जानकारी के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण भारत के अलावा अन्य देशों और क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है। यूरोप, पश्चिमी एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका,प्रशांत महासागर,अटलांटिक महासागर, हिंद महासागर, अंटार्कटिका

आंशिक चंद्र ग्रहण क्या है?

आंशिक चंद्र ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा प्रच्छाया क्षेत्र से थोड़ा बाहर निकलता है, लेकिन पूरी तरह से पार नहीं करता है। यानि चंद्रमा का एक भाग अंधेरे में डूबता है, जबकि कुछ हिस्सा सूर्य के प्रकाश से रोशन रहता है। इस दौरान पृथ्वी के कुछ स्थानों पर चंद्र ग्रहण का दृश्य पूरी तरह से स्पष्ट नहीं होता, बल्कि कुछ हिस्सों में ही चंद्रमा का आंशिक रूप से अंधेरा हो जाता है। कभी-कभी यह आंशिक ग्रहण चंद्रमा के उदय (चन्द्रोदय) या अस्त (चन्द्रास्त) के समय भी देखा जा सकता है। जब चंद्रमा प्रच्छाया क्षेत्र से उपच्छाया क्षेत्र में प्रवेश करता है (या इसके विपरीत) तब कुछ स्थानों पर इसे आंशिक चंद्र ग्रहण के रूप में देखा जा सकता है।

आंशिक चंद्र ग्रहण का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

धार्मिक महत्व: आंशिक चंद्र ग्रहण का धार्मिक महत्व काफी है। धार्मिक दृष्टिकोण से यह समय पापों का नाश और पुण्य प्राप्ति के लिए उपयुक्त होता है। खासतौर से इस दिन उपवास रखकर, ध्यान और पूजा करने से पापों से मुक्त हो सकता है और देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है। हालांकि, प्रच्छाया वाले ग्रहण को ही धार्मिक कर्मकाण्डों के लिए लिया जाता है।

सांस्कृतिक महत्व: सांस्कृतिक दृष्टिकोण से चंद्र ग्रहण को भारतीय परंपरा में एक विशेष अवसर माना जाता है। भारतीय समाज में यह समय त्योहारों और विशेष आयोजनों के लिए नहीं बल्कि विशेष सावधानियों और शुद्धिकरण के समय के रूप में मनाया जाता है। चंद्र ग्रहण के दौरान विशेष प्रकार की पूजा विधियां की जाती हैं और अनुष्ठान होते हैं। इस दौरान विशेष आहार नियमों का पालन, स्नान, ध्यान और दान आदि कार्य किए जाते हैं।

आंशिक चंद्र ग्रहण से जुड़ी मान्यताएं और परंपराएं

  • आंशिक चंद्र ग्रहण से जुड़ीं कई मान्यताएं और परंपराएं हैं, जो धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इन परंपराओं का उद्देश्य ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों से बचाव और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति करना होता है।
  • जैसे चंद्र ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल का आरंभ होता है। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य, जैसे पूजा-पाठ, नई शुरुआत या घर में किसी प्रकार का आयोजन करना वर्जित माना जाता है।
  • सूतक काल के आरंभ के बाद मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। यह परंपरा इस विश्वास पर आधारित है कि ग्रहण के समय मूर्ति पूजा करना निषिद्ध है। इसके कारण, देवालयों में पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। इस समय में मंदिरों में किसी प्रकार का अनुष्ठान या धार्मिक कार्य नहीं किया जाता।
  • ग्रहण के दौरान भोजन पकाने और खाने से परहेज करने की परंपरा है। कहा जाता है कि ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव होता है, जिससे भोजन में अशुद्धता आ सकती है।
  • ग्रहण के समय विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को कई प्रकार की सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि ग्रहण के समय इन सावधानियों का पालन करने से बच्चे की सुरक्षा बनी रहती है और कोई भी हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता।
  • ग्रहण के दौरान ईश्वर का नाम लेना, ध्यान करना और विशेष मंत्रों का जाप (जैसे गायत्री मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र) करना अत्यधिक शुभ माना जाता है। इसके अलवाा ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करने और जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा है।

आंशिक चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें

आंशिक चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें

  • ग्रहण के समय पूजा-पाठ और ध्यान करना अत्यधिक शुभ माना जाता है। ग्रहण के दौरान विशेष रूप से भगवान चंद्र की पूजा करनी चाहिए और चंद्र के मंत्रों का जाप करना चाहिए।
  • ग्रहण के दौरान दान का विशेष महत्व होता है। अन्न, जल, वस्त्र, फल, धन या अपनी सामर्थ्यानुसार कोई भी वस्तु दान कर सकते हैं।

आंशिक चंद्र ग्रहण के दौरान क्या न करें

  • शुभ कार्यों से बचें: चंद्र ग्रहण के दौरान कोई भी शुभ कार्य, जैसे कि नए काम की शुरुआत, विवाह, यज्ञ या अन्य अनुष्ठान नहीं किए जाते।
  • खाना से परहेज: ग्रहण के दौरान खाना पकाने और खाने से परहेज किया जाता है।
  • बरतनी चाहिए सावधानियां: गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान नुकीली वस्तुएं जैसे चाकू और कैंची का उपयोग नहीं करना चाहिए। साथ ही उन्हें घर में ही रहकर अधिक से अधिक शांति का पालन करना चाहिए।

आंशिक चंद्र ग्रहण से पहले और बाद की तैयारी

आंशिक चंद्र ग्रहण से पहले की तैयारी

  • आंशिक चंद्र ग्रहण के दौरान सूतक काल ग्रहण के लगभग 9 घंटे पहले शुरू होता है। इस दौरान, मंदिर के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं और कोई भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, या नई शुरुआत नहीं की जाती।
  • ग्रहण से पहले पके हुए भोजन, दूध और पानी में तुलसी के पत्ते या दूर्वा घास डालना चाहिए।
  • घर का नया काम या पूजा-पाठ को रोक देना चाहिए। इसका उद्देश्य ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव से बचना होता है।
  • मानसिक रूप से शांति बनाए रखना चाहिए। इस समय सकारात्मक विचारों पर ध्यान केंद्रित करना और मानसिक तनाव से बचने की कोशिश करें।

ग्रहण के बाद की तैयारी

  • ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके शुद्धि की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
  • ग्रहण के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करना एक शुभ कार्य माना जाता है।
  • ग्रहण के बाद दान करने से पुण्य मिलता है और नकारात्मक प्रभाव समाप्त होते हैं। विशेष रूप से चावल, दूध और सफेद वस्त्रों का दान शुभ माना जाता है।
  • ग्रहण के बाद घर में पूजा और आरती करनी चाहिए।

आंशिक चंद्र ग्रहण में किए जाने वाले पवित्र कार्य

ग्रहण के दौरान मंत्र जाप करना बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दौरान गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र या अन्य कोई भी देवी-देवता के मंत्रों का जाप किया जा सकता है। यह नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करता है और मानसिक शांति का अनुभव कराता है।

ग्रहण के समाप्त होने के बाद दान करना ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव को दूर करने का एक प्रभावी तरीका है।

जानकारी के अनुसार, ग्रहण के दौरान कांसे की कटोरी में देसी घी भरकर उसमें सिक्के डालने से विशेष लाभ होता है। इसके साथ ही आप मन ही मन दोष निवृत्ति की प्रार्थना कर सकते हैं।

धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना चाहिए इससे मन शांत रहता है।

आंशिक चंद्र ग्रहण का ज्योतिषीय महत्व

चंद्र ग्रहण ग्रहों के प्रभाव को बदलने वाला माना जाता है। ग्रहण के दौरान चंद्रमा की स्थिति व्यक्ति के जीवन पर विशेष प्रभाव डालती है। यदि यह ग्रहण किसी के जन्म कुंडली में किसी ग्रह के विपरीत या दुर्बल स्थिति में हो, तो यह उस व्यक्ति के जीवन में तनाव, आर्थिक समस्याएं या मानसिक परेशानियां उत्पन्न कर सकता है। इसी कारण से ग्रहण के समय खास उपाय और पूजा विधियां की जाती हैं, ताकि इस समय में ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव को कम किया जा सके और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त हो सके।

हिंदू धर्म में आंशिक चंद्र ग्रहण का महत्व

हिंदू धर्म में आंशिक चंद्र ग्रहण का विशेष स्थान है। इसे न तो पूर्ण चंद्र ग्रहण जितना प्रभावशाली माना जाता है न ही उतना नाटकीय होता है, लेकिन फिर भी इस ग्रहण का धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से महत्व है। आंशिक चंद्र ग्रहण के दौरान विशेष रूप से मानसिक शांति, आत्मनिरीक्षण और आध्यात्मिक उन्नति पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इसे एक ऐसा समय माना जाता है, जब व्यक्ति को अपनी दिशा का पुनर्मूल्यांकन करने और भविष्य के लिए अच्छे कार्यों का संकल्प लेने की आवश्यकता होती है।

आंशिक चंद्र ग्रहण का आध्यात्मिक महत्व

आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, चंद्र ग्रहण एक शुद्धिकरण की प्रक्रिया के रूप में देखा जाता है। यह समय आत्मा के शुद्धिकरण, ध्यान और साधना के लिए आदर्श होता है। इस समय को तपस्या और साधना के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। क्योंकि चंद्र ग्रहण के दौरान वातावरण में ऊर्जा का परिवर्तन होता है। साधक इस समय को अपने भीतर के दोषों को दूर करने, मन की शांति और संतुलन प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। यह समय आत्मज्ञान की प्राप्ति के लिए भी उपयुक्त माना जाता है।

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Published by Sri Mandir·June 10, 2026

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