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गौरी चालीसा

मां गौरी की भक्ति में समर्पित इस चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करें। इसके नियमित पाठ से जीवन में आता है प्रेम, पारिवारिक सुख और मां पार्वती की कृपा।

गौरी चालीसा के बारे में

गौरी चालीसा मां पार्वती के सौम्य और करुणामयी स्वरूप की स्तुति है। इसे श्रद्धा से पढ़ने पर मन को शांति, वैवाहिक सुख और जीवन में स्थिरता का आशीर्वाद मिलता है। माना जाता है कि माता गौरी की कृपा से घर में प्रेम, सौहार्द और समृद्धि बनी रहती है। इस लेख में आपको गौरी चालीसा का पाठ, इसका महत्व, पाठ विधि और नियमित पाठ से मिलने वाले लाभों की जानकारी मिलेगी।

गौरी चालीसा क्या है?

माँ गौरी, शिव की अर्धांगिनी और सृष्टि की करुणामयी जननी, सुख-समृद्धि और मोक्ष प्रदान करने वाली देवी हैं। उनकी भक्ति में गाए जाने वाले "गौरी चालीसा" में वह दिव्य शक्ति निहित है जो भक्तों के सभी कष्टों को हरकर जीवन में आनंद और शांति भर देती है।

गौरी चालीसा का पाठ क्यों करें?

गौरी चालीसा का पाठ देवी पार्वती (गौरी) की स्तुति में किया जाता है। इसका पाठ करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, विशेष रूप से विवाह और वैवाहिक जीवन से संबंधित। इसके अतिरिक्त, यह पाठ सुख, समृद्धि और खुशहाली लाता है।

  • विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए
  • वैवाहिक जीवन में प्रेम और स्थिरता के लिए
  • मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए
  • आत्मबल और मानसिक शांति के लिए
  • संतान सुख की प्राप्ति हेतु
  • नारी शक्ति के जागरण के लिए
  • आध्यात्मिक उन्नति के लिए

गौरी चालीसा चौपाई

॥चौपाई॥

मन मंदिर मेरे आन बसो, आरम्भ करूं गुणगान,

गौरी माँ मातेश्वरी, दो चरणों का ध्यान।

पूजन विधी न जानती, पर श्रद्धा है आपर,

प्रणाम मेरा स्विकारिये, हे माँ प्राण आधार।

नमो नमो हे गौरी माता, आप हो मेरी भाग्य विधाता,

शरनागत न कभी गभराता, गौरी उमा शंकरी माता।

आपका प्रिय है आदर पाता, जय हो कार्तिकेय गणेश की माता,

महादेव गणपति संग आओ, मेरे सकल कलेश मिटाओ।

सार्थक हो जाए जग में जीना, सत्कर्मो से कभी हटु ना,

सकल मनोरथ पूर्ण कीजो, सुख सुविधा वरदान में दीज्यो।

हे माँ भाग्य रेखा जगा दो, मन भावन सुयोग मिला दो,

मन को भाए वो वर चाहु, ससुराल पक्ष का स्नेहा मै पायु।

परम आराध्या आप हो मेरी, फ़िर क्यूं वर मे इतनी देरी,

हमरे काज सम्पूर्ण कीजियो, थोडे में बरकत भर दीजियो।

अपनी दया बनाए रखना, भक्ति भाव जगाये रखना,

गौरी माता अनसन रहना, कभी न खोयूं मन का चैना।

देव मुनि सब शीश नवाते, सुख सुविधा को वर मै पाते,

श्रद्धा भाव जो ले कर आया, बिन मांगे भी सब कुछ पाया।

हर संकट से उसे उबारा, आगे बढ़ के दिया सहारा,

जब भी माँ आप स्नेह दिखलावे, निराश मन मे आस जगावे।

शिव भी आपका काहा ना टाले, दया द्रष्टि हम पे डाले,

जो जन करता आपका ध्यान, जग मे पाए मान सम्मान।

सच्चे मन जो सुमिरन करती, उसके सुहाग की रक्षा करती,

दया द्रष्टि जब माँ डाले, भव सागर से पार उतारे।

जपे जो ओम नमः शिवाय, शिव परिवार का स्नेहा वो पाए,

जिसपे आप दया दिखावे, दुष्ट आत्मा नहीं सतावे।

सात गुण की हो दाता आप, हर इक मन की ज्ञाता आप,

काटो हमरे सकल कलेश, निरोग रहे परिवार हमेश।

दुख संताप मिटा देना माँ, मेघ दया के बरसा देना माँ,

जबही आप मौज में आय, हठ जय माँ सब विपदाएं।

जीसपे दयाल हो माता आप, उसका बढ़ता पुण्य प्रताप,

फल-फूल मै दुग्ध चढ़ाऊ, श्रद्धा भाव से आपको ध्यायु।

अवगुन मेरे ढक देना माँ, ममता आंचल कर देना मां,

कठिन नहीं कुछ आपको माता, जग ठुकराया दया को पाता।

बिन पाऊ न गुन माँ तेरे, नाम धाम स्वरूप बहू तेरे,

जितने आपके पावन धाम, सब धामो को मां प्राणम।

आपकी दया का है ना पार, तभी को पूजे कुल संसार,

निर्मल मन जो शरण मे आता, मुक्ति की वो युक्ति पाता।

संतोष धन्न से दामन भर दो, असम्भव को माँ सम्भव कर दो,

आपकी दया के भारे, सुखी बसे मेरा परिवार।

आपकी महिमा अति निराली, भक्तो के दुःख हरने वाली,

मनोकामना पुरन करती, मन की दुविधा पल मे हरती।

चालीसा जो भी पढे सुनाया, सुयोग वर् वरदान मे पाए,

आशा पूर्ण कर देना माँ, सुमंगल साखी वर देना माँ।

गौरी माँ विनती करूँ, आना आपके द्वार,

ऐसी माँ कृपा किजिये, हो जाए उद्धहार।

हीं हीं हीं शरण मे, दो चरणों का ध्यान,

ऐसी माँ कृपा कीजिये, पाऊँ मान सम्मान।

पाठ की विधि और नियम

  • सुबह या शाम के समय स्नान कर साफ-सुथरे वस्त्र पहनें।
  • एक स्वच्छ स्थान पर माँ गौरी (या माँ पार्वती) की प्रतिमा या चित्र रखें।
  • दीप प्रज्वलित कर भगवान गणेश का स्मरण करें।
  • पाठ से पहले 3 बार “ॐ गौर्यै नमः” या “ॐ नमः पार्वत्यै” मंत्र बोलें।
  • पाठ के बाद माँ गौरी की आरती करें।
  • देवी को मिश्री, नारियल, फल, दूध या मिठाई अर्पित करें। अपनी मनोकामना और कृतज्ञता व्यक्त करें।

गौरी चालीसा के लाभ

  • विवाह में आने वाली बाधाओं का नाश: जो कन्याएं विवाह योग्य हैं और उनके विवाह में बार-बार अड़चनें आ रही हैं, उनके लिए गौरी चालीसा का नियमित पाठ अत्यंत लाभकारी है।

  • मनोकामनाओं की पूर्ति: माँ गौरी को प्रसन्न करने से धन, संतान, शिक्षा, करियर या स्वास्थ्य से जुड़ी मनोकामनाएं शीघ्र पूरी हो सकती हैं।

  • मानसिक शांति और आत्मिक बल: इस चालीसा का पाठ मन को शांत करता है, तनाव, डर और अवसाद को दूर करता है, और व्यक्ति के भीतर आत्मबल तथा सकारात्मक सोच का संचार करता है।

  • नकारात्मक ऊर्जा और बुरी दृष्टि से रक्षा: गौरी माता की कृपा से घर-परिवार पर कोई नज़र दोष, तंत्र बाधा या नकारात्मक ऊर्जा असर नहीं करती। घर का वातावरण पवित्र और ऊर्जा से भरपूर रहता है।

  • संतान प्राप्ति और मातृत्व सुख: जो महिलाएं संतान सुख की इच्छा रखती हैं, वे यदि सच्चे भाव से यह चालीसा पढ़ें तो उन्हें सौम्यता, धैर्य और मातृत्व का आशीर्वाद मिलता है।

  • सौंदर्य, आकर्षण और स्त्रीत्व में वृद्धि: गौरी माता सौंदर्य और तेज की देवी हैं। उनका नियमित स्मरण और चालीसा पाठ स्त्रियों में आत्मविश्वास, आभा और आकर्षण को बढ़ाता है।

अगर आप अपने जीवन में शांति, सौंदर्य, प्रेम और वैवाहिक सुख की तलाश में हैं। मां पार्वती के स्वरूप को जानना चाहते हैं, तो गौरी चालीसा पाठ जरूर करें।

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Published by Sri Mandir·September 18, 2025

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