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माँ दुर्गा आरती

माँ दुर्गा आरती

माँ दुर्गा कीआरती


माँ दुर्गा आरती

ममता, शक्ति और करुणा की देवी दुर्गा हिंदू धर्म में बहुत विशेष मानी गई हैं। मान्यताओं के अनुसार, माँ अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होगी हैं। इसलिए प्रत्येक भक्त को माता की आरती जरूर करना चाहिए। माना जाता है कोई भी पूजा बिना आरती के अधूरी है। यहां हम आपके समक्ष अम्बे तू है जगदम्बे काली, और ॐ जय अम्बे गौरीदो आरती प्रस्तुत कर रहे हैं। आप अपनी पसंद के अनुसार की आरती का पाठ कर सकते हैं।

आरती 1 - अम्बे तू है जगदम्बे काली

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली, तेरे ही गुण गायें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ।

तेर भक्त जानो पर मैया भीड़ पड़ी है भारी, दानव दल पर टूट पड़ो माँ कर के सिंह सवारी । सो सो सिंहों से है बलशाली, है अष्‍ट भुजाओं वाली, दुखिओं के दुखड़े हारती ।

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली, तेरे ही गुण गायें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ।

माँ बेटे की है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता, पूत कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता । सबपे करुना बरसाने वाली, अमृत बरसाने वाली, दुखिओं के दुखड़े निवारती ।

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली, तेरे ही गुण गायें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ।

नहीं मांगते धन और दौलत ना चांदी ना सोना, हम तो मांगे माँ तेरे मन में एक छोटा सा कोना । सब की बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली,

सतिओं के सत को सवारती । ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ।

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली, तेरे ही गुण गायें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ।

चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली। वरद हस्त सर पर रख दो माँ संकट हरने वाली॥ मैया भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली, भक्तों के कारज तू ही सारती। ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती, हम सब उतारे तेरी आरती॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली, तेरे ही गुण गायें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ।

आरती 2 - ॐ जय अम्बे गौरी

ॐ जय अम्बे गौरी , मैया जय श्यामा गौरी । तुमको निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवजी ॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी ॥

मांग सिंदूर विराजत टीको मृगमद को । उज्जवल से दोउ नैना चन्द्रवदन नीको ॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी ॥

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजे । रक्तपुष्प गल माला कण्ठन पर साजे ॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी ॥

केहरि वाहन राजत खड्ग खप्पर धारी । सुर नर मुनि जन सेवत तिनके दुख हारी ॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी ॥

कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती । कोटिक चन्द्र दिवाकर सम राजत ज्योति ॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी ॥

शुम्भ निशुम्भ विदारे महिषासुर घाती । धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती ॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी ॥

चंड मुंड संहारे शोणित बीज हरे । मधु कैटभ दोउ मारे सुर भयहीन करे ॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी ॥

ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी । आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी ॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी ॥

चौसठ योगिनी गावत नृत्य करत भैरों । बाजत ताल मृदंगा अरू बाजत डमरू ॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी ॥

तुम ही जग की माता तुम ही हो भरता । भक्तन की दुख हरता सुख संपति करता ॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी ॥

भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारी । मनवांछित फल पावत सेवत नर नारी ॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी ॥

कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती । श्रीमालकेतु में राजत कोटि रतन ज्योति ॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी ॥

श्री अम्बे जी की आरती जो कोई नर गावे । कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित पावे ॥

आप भी माता सभी भक्तों के साथ माता भगवती की आरती पढ़ें। संपूर्ण पूजा के बाद, संध्या के समय या फिर जब भी आप माता की आरती करें तो प्रत्येक आरती को जोर-जोर से गाकर पढ़ना चाहिए।

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