
5 अगस्त 2025 को क्या है? जानें इस दिन का पंचांग, द्वादशी तिथि का महत्व, पूजा विधि, राहुकाल और शुभ समय।
5 अगस्त 2025 का दिन आस्था, श्रद्धा और शुभ संयोगों से भरा होगा। इस दिन पड़ने वाले व्रत और त्योहार न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि इनके पीछे की पौराणिक कथाएं भी प्रेरणादायक हैं। साथ ही, इस दिन के शुभ मुहूर्त आपके कार्यों में सफलता दिलाने वाले होंगे। इस लेख में जानिए 5 अगस्त 2025 से जुड़ी हर खास जानकारी, जो इस दिन को आपके लिए और भी महत्वपूर्ण बना देती है।
5 अगस्त 2025 को मंगलवार है और यह श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है। इस दिन श्रावण पुरुषोत्तम द्वादशी का व्रत मनाया जाता है, जिसे श्रद्धा और भक्ति से रखा जाता है। यह तिथि भगवान विष्णु तथा पितृ देवताओं का पूजन करने के लिए विशेष शुभ मानी जाती है।
तिथि: द्वादशी
आरंभ: 5 अगस्त को दोपहर 1:12 बजे से
समाप्ति: 6 अगस्त को दोपहर 2:08 बजे तक
नक्षत्र: मूल (11:22 AM से बाद में), पूर्वाह्न ज्येष्ठा
योग: वैधृति योग प्रारंभ
करण: विष्टी शुरू, बाद में बावा
वार: मंगलवार
श्रावण मास की द्वादशी विशेष रूप से पौराणिक पुरुषोत्तम व्रत के रूप में मान्य है। धन्यवाद, पुण्य व पितृ तर्पण का दिन माना जाता है। यह व्रत व्रतधारकों को पितृ प्रसन्नि, मानसिक शांति और स्वास्थ्य संबंधी लाभ प्रदान करता है।
इस दिन अस्थि विसर्जन, पितृ तर्पण, विष्णु पूजा और पूजन-पाठ बहुत ही फलदायी होते हैं।
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
पूर्वोत्तर दिशा में भगवान विष्णु या पितृ देवताओं की पूजा करें
तुलसी, फल, दाना और नैवेद्य अर्पित करें
सुहागेल या पितृ तर्पण करें
विष्णु सहस्रनाम, हरि स्तोत्र या द्वादशी कथा पढ़ें
दीपक प्रज्वलित कर आरती करें
फलाहार या लगे रह कर उपवास करें
शाम को पूजा कर प्रसाद ग्रहण करें
पितृ पक्ष में अन्न‑द्रव्य दान और सेवा करें
राहुकाल: 3:23 PM से 5:02 PM (अनुकूल समय से बचें)
गुलिका काल: दोपहर बाद 12:05 PM से 1:44 PM तक
शुभ समय: विशिष्ट वक्तों जैसे अभिजीत मुहूर्त (लगभग दोपहर 12:00 से 12:50), और शाम के आरती समय आदर्श माने जाते हैं
5 अगस्त 2025 की द्वादशी तिथि पुरुषोत्तम व्रत और विष्णु–पितृ पूजन का महत्वपूर्ण अवसर है। इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखने और पूजा करने से पितृ दोष मुक्ति, मानसिक स्थिरता, स्वास्थ्य में सुधार और आध्यात्मिक उन्नति संभव है। श्रद्धा से साधना और सेवा करने वाले भक्तों को विशेष पुण्य परिणाम प्राप्त होता है।
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