31 मई 2026 को क्या है?
image
downloadDownload
shareShare
ShareWhatsApp

31 मई 2026 को क्या है? | 31 May 2026 Ko Kya Hai

जानिए इस दिन का पंचांग, व्रत-त्योहार और शुभ मुहूर्त। इस दिन के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व की पूरी जानकारी यहां विस्तार से जानें।

आज के दिन के बारे में

पंचांग में हर तारीख का एक खास संदर्भ होता है, और उसी आधार पर उस दिन की स्थिति समझी जाती है। तिथि के अनुसार कौन-सा योग या विशेष संयोग बनता है, यह जानना कई बार लोगों के लिए दिलचस्प रहता है। आइए जानते हैं इस दिन से जुड़े व्रत-त्योहार, पूजा-विधि और धार्मिक महत्व के बारे में।

31 मई 2026 को क्या है?

31 मई 2026 का दिन ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णिमा तिथि के रूप में आता है, जो हिंदू पंचांग में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। रविवार का संयोग इस दिन को और अधिक विशेष बना देता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए पूजा-पाठ, व्रत और दान से मानसिक शांति और शुभ फल की प्राप्ति होती है।

पंचांग विवरण

  • तिथि: शुक्ल पक्ष पूर्णिमा – दोपहर 2:15 PM तक
  • वार: रविवार
  • नक्षत्र: अनुराधा – दोपहर 4:12 PM तक
  • योग: शिव – सुबह 5:25 AM तक
  • करण: बव – दोपहर 2:15 PM तक
  • मास (अमांत): ज्येष्ठ
  • मास (पूर्णिमांत): ज्येष्ठ
  • विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थ)
  • शक संवत: 1948 (प्रभाउ)
  • सूर्य राशि: वृष
  • चंद्र राशि: वृश्चिक
  • ऋतु: ग्रीष्म
  • अयन: उत्तरायण
  • दिशाशूल: पश्चिम
  • चंद्र निवास: उत्तर

त्यौहार व व्रत

31 मई 2026 को ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि पड़ रही है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन व्रत, ध्यान और दान-पुण्य करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आने की मान्यता है।

शुभ-अशुभ समय

  • शुभ मुहूर्त: 11:30 AM से 12:24 PM
  • राहुकाल: 5:03 PM से 6:45 PM
  • गुलिक काल: 3:21 PM से 5:03 PM
  • यमघण्ट काल: 11:57 AM से 1:39 PM

सूर्य और चंद्र विवरण

  • सूर्योदय: 5:09 AM
  • सूर्यास्त: 6:45 PM
  • चंद्रोदय: 6:59 PM
  • चंद्रास्त: 4:40 AM

पूजा-व्रत विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • भगवान विष्णु और चंद्र देव का ध्यान करें।
  • पूर्णिमा व्रत रखें और फलाहार या उपवास करें।
  • मंदिर जाकर दीपक जलाएं और पूजा-अर्चना करें।
  • गरीबों और जरूरतमंदों को दान करें।
  • शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करें।

निष्कर्ष

31 मई 2026 का दिन ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि के कारण धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। रविवार का संयोग इस दिन के महत्व को और बढ़ा देता है। इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा, दान और व्रत से जीवन में शांति, सकारात्मकता और शुभ फल की प्राप्ति होने की मान्यता है।

divider
Published by Sri Mandir·April 21, 2026

Did you like this article?

srimandir-logo

श्री मंदिर ने श्रध्दालुओ, पंडितों, और मंदिरों को जोड़कर भारत में धार्मिक सेवाओं को लोगों तक पहुँचाया है। 100 से अधिक प्रसिद्ध मंदिरों के साथ साझेदारी करके, हम विशेषज्ञ पंडितों द्वारा की गई विशेष पूजा और चढ़ावा सेवाएँ प्रदान करते हैं और पूर्ण की गई पूजा विधि का वीडियो शेयर करते हैं।

हमारा पता

फर्स्टप्रिंसिपल ऐप्सफॉरभारत प्रा. लि. 2nd फ्लोर, अर्बन वॉल्ट, नं. 29/1, 27वीं मेन रोड, सोमसुंदरपल्या, HSR पोस्ट, बैंगलोर, कर्नाटक - 560102
YoutubeInstagramLinkedinWhatsappTwitterFacebook