31 जुलाई 2026 को क्या है?
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31 जुलाई 2026 को क्या है? | 31 July 2026 Ko Kya Hai

जानिए इस दिन का पंचांग, ​​व्रत-त्योहार और शुभ मुहूर्त। इस दिन के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व की पूरी जानकारी यहां विस्तार से जानें।

आज के दिन के बारे में

हर दिन का पंचांग तिथि, नक्षत्र, योग और शुभ-अशुभ समय की जानकारी देकर दिन को विशेष बनाता है। 31 जुलाई 2026 के दिन कौन-से शुभ योग बन रहे हैं, ग्रहों की स्थिति कैसी रहेगी और धार्मिक दृष्टि से इस दिन का क्या महत्व माना गया है, आइए जानते हैं।

31 जुलाई 2026 को क्या है?

31 जुलाई 2026 का दिन धार्मिक और पंचांग की दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। यह दिन श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि में आता है और शुक्रवार का दिन होने के कारण देवी लक्ष्मी और भोग-विलास से जुड़ी साधना के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन सौभाग्य योग और धनिष्ठा नक्षत्र का प्रभाव देखने को मिलता है, जो शुभ कार्यों और जीवन में स्थिरता बढ़ाने वाला माना जाता है। वर्षा ऋतु और दक्षिणायन काल के चलते यह समय आध्यात्मिक साधना और पूजा-पाठ के लिए भी अनुकूल है।

पंचांग विवरण

  • तिथि: कृष्ण पक्ष द्वितीया – रात 10:32 PM तक
  • वार: शुक्रवार
  • नक्षत्र: धनिष्ठा – 7:27 PM तक
  • योग: सौभाग्य – रात 11:55 PM तक
  • करण: तैतिल – सुबह 10:02 AM तक
  • मास (अमांत): आषाढ़
  • मास (पूर्णिमांत): श्रावण
  • विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थ)
  • शक संवत: 1948 (प्रभाउ)
  • सूर्य राशि: कर्क
  • चंद्र राशि: मकर
  • ऋतु: वर्षा
  • अयन: दक्षिणायन
  • दिशाशूल: पश्चिम
  • चंद्र निवास: दक्षिण

शुभ-अशुभ समय

शुभ मुहूर्त: 11:39 AM से 12:31 PM राहुकाल: 10:25 AM से 12:05 PM गुलिक काल: 7:05 AM से 8:45 AM यमघण्ट काल: 3:25 PM से 5:05 PM

सूर्य और चंद्र विवरण

सूर्योदय: 5:25 AM सूर्यास्त: 6:45 PM चंद्रोदय: 7:56 PM चंद्रास्त: 6:44 AM

पूजा-व्रत विधि

  • सुबह स्नान कर स्वच्छ और हल्के रंग के वस्त्र धारण करें।
  • भगवान शिव और माता लक्ष्मी की पूजा करना शुभ माना गया है।
  • शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करें।
  • मां लक्ष्मी को कमल पुष्प और खीर का भोग लगाएं।
  • इस दिन मंत्र जाप और ध्यान करने से मानसिक शांति मिलती है।
  • जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या धन का दान करना शुभ फल देता है।
  • शाम के समय दीपक जलाकर ईश्वर की आरती करें।

निष्कर्ष

31 जुलाई 2026 का दिन श्रावण मास, सौभाग्य योग और धनिष्ठा नक्षत्र के संयोग के कारण आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना गया है। शुक्रवार का दिन होने से यह समय धन, सुख-समृद्धि और भक्ति के लिए भी विशेष बन जाता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा-पाठ करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सौभाग्य और मानसिक संतुलन की प्राप्ति होती है।

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Published by Sri Mandir·May 27, 2026

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